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Astrology : गुरु चांडाल योग से बिगड़ सकते हैं बने बनाए काम, जानें किन उपायों से मिल सकता है छुटकारा

Sat, 15 Jan 2022 09:43 AM IST
श्वेता सिंह ज्योतिष डेस्क, अमरउजाला, नई दिल्ली

सार

Astrology: ज्योतिष शास्त्र में कई प्रकार के शुभ और अशुभ योगों का वर्णन है, उन्हीं में से एक योग है गुरु चांडाल योग।  गुरु चांडाल योग गुरु, राहु और केतु के मिलने से बनता है। आइए जानते हैं गुरु चांडाल योग के क्या दुष्प्रभाव हैं और इसके दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए क्या उपाय करने चाहिए। 
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गुरु चांडाल योग
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विस्तार
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ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जब भी किसी कुंडली का निर्माण किया जाता है तो उसमें योग बहुत ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। शुभ योग बहुत से काम में तरक्की दिलाते हैं और वहीं अशुभ योग बने बनाए काम बिगाड़ने की क्षमता रखते हैं। व्यक्ति की कुंडली में कई शुभ और अशुभ योग ग्रहों के संयोग से बनते हैं। ज्योतिष शास्त्र में कई प्रकार के शुभ और अशुभ योगों का वर्णन है, उन्हीं में से एक योग है गुरु चांडाल योग।  गुरु चांडाल योग गुरु, राहु और केतु के मिलने से बनता है। आइए जानते हैं गुरु चांडाल योग के क्या दुष्प्रभाव हैं और इसके दुष्प्रभाव को दूर करने के लिए क्या उपाय करने चाहिए। 
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गुरु चांडाल योग का प्रभाव
जब व्यक्ति की कुंडली में गुरु चंडाल का योग का निर्माण होता है तो व्यक्ति सफलताओं के लिए संघर्ष करता है। धन की कमी उत्पन्न हो जाती है। व्यक्ति निराशा और नकारात्मकता से घिर जाता है। ज्योतिष शास्त्र में  ‘गुरु चांडाल’ योग को अत्यंत अशुभ योग मना गया है। जिस व्यक्ति की कुंडली में ‘गुरु चांडाल’ योग होता है, उसे शिक्षा, जॉब, बिजनेस, शादी विवाह आदि में बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इसलिए इस अशुभ योग का उपाय जरुरी हो जाता है।  

गुरु चांडाल योग का उपाय 
  • ज्योतिष शास्त्र में गुरु चांडाल योग से बचाव के उपाय भी बताए गए हैं जिन्हें अपनाकर  इस अशुभ योग के दुष्प्रभाव दूर किए जा सकते हैं। आइए जानते हैं क्या है वो उपाय- 
  •  ‘गुरु चांडाल’ योग के प्रभाव को कम करने के लिए माथे पर रोजाना केसर, हल्दी का तिलक लगाना चाहिए। 
  • गुरुवार को पीले वस्त्र पहनकर पीली वस्तुओं का दान करना चाहिए। 
  • गुरुजनों का आर्शीवाद प्राप्त कर उनका आदर करना चाहिए। 
  • इसके अलावा राहु के मंत्रों का जाप करें। 
  • साथ ही बृहस्पतिवार को भगवान विष्णु की पूजा करनी चाहिए। 
  • संभव हो तो केले का पौधा लगाएं और उसकी नित्य पूजा करें।
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