मानसून के दौरान बाढ़ और बढ़ता तापमान से चाय के बागान वालों के लिए खतरे की घंटी साबित हो रहा है। चाय बागान में लगने वाला रेड स्पाइडर माइट (कीट) मार्च-अप्रैल में लगता था, वो अब पूरे साल नुकसान पहुंचाने लगा है।
असम और सिलिगुड़ी के चाय बागान मालिकों को बदलते मौसम से होने वाले नुकसान को अपने खेतों में दिखने लगा है। जलवायु परिवर्तन से बढ़े तापमान का असर यह हुआ कि तरह-तरह के कीटों का हमला बढ़ गया और इन कीटों से बचाने के लिए काफी अधिक मात्रा में कीटनाशक के छिड़काव से चाय के निर्यात में भी दिक्कत आ रही है।
| देश | उत्पादन (लाख टन) |
| चीन | 24 लाख टन |
| भारत | 13 लाख टन |
| केन्या | 4.3लाख टन |
| श्रीलंका | 3.4लाख टन |