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अनार को सड़न रोग से बचाने के लिए समय पर करें छिड़काव

Mon, 02 Sep 2019 03:27 PM IST
अरविन्द ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सोलन
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डॉ. जेएस चंदेल - फोटो : अमर उजाला
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भारी बारिश के कारण फलों में धब्बा सहित सड़न रोग लग जाता है। इससे बागवानों को नुकसान झेलना पड़ता है। अनार के फलों में यह रोग लग रहा है। बागवान-किसान अनार फल में धब्बा तथा सड़न रोगों की रोकथाम के लिए मैंकोजेब 600 ग्राम/200 लीटर पानी या काबैंडाजिम 100 ग्राम 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें।

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नींबू प्रजातीय फलों और अनार में कैंकर रोग की रोकथाम के लिए कॉपर-ऑक्सीक्लोराइड 600 ग्राम व स्ट्रेप्टीसाइक्लीन 40 ग्राम का 200 लीटर पानी में घोल बनाकर छिड़काव करें। संबधित छिड़काव को बारिश के बाद ही किया जाना चाहिए। इस छिड़काव को करीब एक सप्ताह के बाद दोबारा से करना चाहिए। यह जानकारी डॉ. जेएस चंदेल विभाग अध्यक्ष फल विज्ञान विभाग डॉ. वाईएस परमार उद्यानिकी एवं वानिकी विश्व विद्यालय नौणी ने दी है। 

फसलों से खरपतवार निकालें किसान
किसानों को सलाह दी है कि खेतों से खरपतवार निकालें, निराई-गुडाई करें, गले-सड़े फलों व पत्तों को निकालकर नष्ट कर दें। फसलों व सब्जियों में सफेद मक्खी या चूसक कीटों की रोकथाम के लिए इमिडाक्लोप्रिड 1.0 मिली प्रति 3 लीटर पानी में घेल बनाकर छिड़काव करें। फल छेदक की रोकथाम के लिए इंडोक्साकार्ब 14.5 ई.सी 11 मिलीलीटर या लैम्डा साइलोथ्रिन 05 ई.सी क्रोट 18.75 मिलीलीटर का घोल 15 लीटर पानी में बनाकर छिड़काव करें।
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मौनवंशों को दें चीनी का घोल 
वर्षा ऋतु में नमी व तापमान अधिक होने के कारण मधुमक्खियों के लिए यह मौसम प्रतिकूल होता है। लंबी अवधि तक बारिश होने के कारण मधुमक्खियां मौनगृह में ही बंद रहती हैं। इस कारण मधुमक्खियां सुस्त हो जाती हैं व कई बार दस्त भी लग जाते हैं। रानीरहित कमजोर मौनवंशों को शक्तिशाली मौनवंशों के साथ मिलाएं। आवश्यकतानुसार मौनवंशों को चीनी का घोल दें। इसके अलावा मधुमक्खियों को मोमी पतंगों, माइट व रिंगल के आक्रमणों से भी बचाएं।

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