देश में हर तरफ व्याप्त कोरोना महामारी के प्रकोप के बावजूद इस साल रबी की अच्छी-खासी फसल होने की संभावना जताई जा रही है। साथ ही इस बात की भी पूरी संभावना है कि दलहन का उत्पादन सबसे ज्यादा बढ़ जाए। अब तक की बुआई के आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि देश के कृषि क्षेत्र पर कोविड-19 की दूसरी लहर का असर नहीं हुआ है।
फसलों की बुआई बढ़ी
कृषि मंत्रालय के अनुसार सात मई तक रबी फसलों की बुआई 21.58 फीसदी बढ़ गई है। पिछले सीजन में इस तारीख तक 65.82 लाख हेक्टेयर में रबी फसलों की बुआई हुई थी जबकि इस साल इसकी बुआई 80.02 लाख हेक्टेयर में हुई है। बता दें, केवल रबी ही नहीं बल्कि दलहन, तिलहन, मोटे अनाज, धान व अन्य सभी फसलों की बुआई बढ़ी है। ऐसे में इन फसलों के भाव भी घट सकते हैं।
पिछले साल 10.49 लाख हेक्टेयर में दलहन की बुआई हुई थी
दलहन का रकबा सबसे ज्यादा 69.22 फीसदी बढ़ा है। पिछले साल सात मई तक 10.49 लाख हेक्टेयर में दलहन की बुआई हुई थी जबकि इस साल इसी तारीख तक में 17.75 लाख हेक्टेयर दलहन की बुआई हुई है। इस दौरान मूंग का रकबा 8.29 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 14.42 हेक्टेयर और उड़द का रकबा 1.95 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 2.94 लाख हेक्टेयर हो गया।
किसानों ने तिलहन की खेती भी बढ़ाई
इस साल किसानों ने तिलहन की खेती भी बढ़ाई है। अब तक 10.74 लाख हेक्टेयर में तिलहन बोई गई है, जबकि पिछले साल इस समय तक 9.58 लाख हेक्टेयर में तिलहन की बुआई हुई थी। इस तरह अब तक तिलहन का रकबा 12.05% बढ़ गया है। इस बीच धान का रकबा 15.52% यानी 5.30 लाख हेक्टेयर बढ़कर 39.43 लाख हेक्टेयर हो गया। पिछले साल इस समय तक 34.13 लाख हेक्टेयर में धान की बुआई हुई थी। इसी तरह रबी सीजन में अब तक मोटे अनाज का रकबा 11.62 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 12.11 लाख हेक्टेयर हो गया।
28 फीसदी कम हुई बारिश
रबी सीजन में अब तक सामान्य से 28 प्रतिशत कम बारिश हुई है। एक मार्च से लेकर छह मई के बीच देश में 57.5 मिलीमीटर प्री-मॉनसून बारिश हुई, जबकि इस अवधि में औसतन 79.8 मिलीमीटर बारिश होती है।