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पहले खेती में हो रहा था घाटा, अब 10 लाख कमा रहा ये किसान, आप भी अपनाएं ये तरीका

Sun, 06 Oct 2019 07:03 PM IST
ajay kumar विकास छिंपा, अमर उजाला, भूना/ फतेहाबाद (हरियाणा)
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : social media
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हरियाणा के गांव दहमान के एक किसान ने लगातार परंपरागत खेती की और उसे प्रतिवर्ष पांच से सात लाख के बीच घाटा उठाया । मगर जब परंपरागत खेती को त्याग दिया तो लाखों रुपये के वारे न्यारे हो गए। किसान ने परंपरागत को छोड़कर बागवानी एवं नर्सरी को बढ़ावा दिया अन्य लोगों को रोजगार भी दे दिया। अब किसान और प्रतिवर्ष खर्चा निकाल कर 10 लाख रुपए की बचत कर रहा है।

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गांव दहमान के किसान फूल कुमार दहिया के पास कृषि योग्य 12 एकड़ जमीन है। जिसमें किसान पिछले कई वर्षों से नरमा, गेहूं व धान इत्यादि की फसल की पैदावार ले रहा था। मगर किसान को आमदनी होने की बजाए घाटा होता जा रहा था। जिसको लेकर किसान फूल कुमार ने उपरोक्त फसलों को छोड़कर 12 एकड़ में  बाग व नर्सरी फार्म खोल दिया। जिसके बाद किसान तरक्की करता चला गया।

किसान ने बाग में आडू शान ऐ पंजाब व आलू बुखारा सतलुज परपल की किस्में लगाई हुई हैं। इसके अतिरिक्त हिसार सफेदा अमरूद एवं पेमली बेर के बाग आदि के साथ साथ पौने एकड़ में नर्सरी का फार्म बनाया हुआ है। नर्सरी फार्म में डेकोरेशन एवं छायादार पौधे सीजनल तथा सदाबहार  मिलते हैं।

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किसान फूल कुमार दहिया ने बताया कि वर्ष 2007 के बाद उसने अपनी 12 एकड़  जमीन में कभी भी गेहूं नरमा, कपास व धान की पैदावार नहीं ली और पूरा बागवानी पर ध्यान आकर्षित कर दिया। जिससे उसका जीवन ही बदल गया। किसान ने बताया कि परंपरागत फसलों में बचत से ज्यादा खर्चा हो जाता है ओर मेहनत मजदूरी अलग से लग जाती है।
 
मगर बाग में खर्चा नाममात्र होने के साथ-साथ बचत कई गुना ज्यादा है। जिसको लेकर उसके परिवार के कई लोगों ने भी 30 एकड़ में बाग लगा दिया है। क्योंकि उपरोक्त लोगों मेरी लाखों की आय से प्रभावित हुए हैं जिसको लेकर उन्होंने भी परंपरागत खेती को छोड़कर बाग लगाने के मार्ग पर चले हैं।        
                                              
15 लोगों को स्थायी रोजगार दिया
किसान फूल कुमार दहिया ने बताया कि नर्सरी फार्म में 15 लोगों को स्थायी रोजगार मिला हुआ है। जबकि 70 से ज्यादा लोगों को बाग में फल तोड़ने व बेचने तथा मंडियों में पहुंचाने का काम मिला हुआ है । बाग एवं नर्सरी के कर्मचारियों का वेतन तथा खर्च को निकाल कर प्रतिवर्ष 10 लाख के लगभग मुनाफा हो रहा है । किसान ने बताया कि वह  पूरे दिन नर्सरी फार्म पर बैठकर विभिन्न प्रकार के पौधे तैयार करवाता है।      
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राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से मिल गई मान्यता

श्री बालाजी नर्सरी एवं चेयरमैन फ्रूट फार्म दहमान के संचालक किसान फूल कुमार दहिया ने बताया कि पिछले कई दिनों से राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से बाग पंजीकरण करवाने को लेकर प्रयास चल रहा था। जिसको लेकर वर्ष 2019 में उन्हें मान्यता मिल गई है।
 
किसान ने बताया कि हरियाणा, पंजाब में  हिसार सफेदा कलमी पौधों की अधिक डिमांड बढ़ गई  है, उस पर अब काम करना शुरू कर दिया है। क्योंकि उनके पास अमरूद का मदर प्लांट है । मदर पौधों की कलम बनाकर हिसार सफेदा पौध तैयार होती है।

गेंहू व चावल बाजार से खरीदते हैं
किसान फूल कुमार दहिया ने बताया पिछले 12 वर्षों वह अपने परिवार के लिए खाने हेतु गेहूं व चावल बाजार से खरीद कर लाते हैं । फूल कुमार द्वारा परंपरागत खेती को तैयार छोड़कर बागवानी के प्रति रुझान करने के बाद दहमान के कई किसानों में भी परिवर्तन आया है। जिसके बाद अब दहमान  में चार नर्सरी फार्म खुल चुके हैं।
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