किसान फूल कुमार दहिया ने बताया कि वर्ष 2007 के बाद उसने अपनी 12 एकड़ जमीन में कभी भी गेहूं नरमा, कपास व धान की पैदावार नहीं ली और पूरा बागवानी पर ध्यान आकर्षित कर दिया। जिससे उसका जीवन ही बदल गया। किसान ने बताया कि परंपरागत फसलों में बचत से ज्यादा खर्चा हो जाता है ओर मेहनत मजदूरी अलग से लग जाती है।
मगर बाग में खर्चा नाममात्र होने के साथ-साथ बचत कई गुना ज्यादा है। जिसको लेकर उसके परिवार के कई लोगों ने भी 30 एकड़ में बाग लगा दिया है। क्योंकि उपरोक्त लोगों मेरी लाखों की आय से प्रभावित हुए हैं जिसको लेकर उन्होंने भी परंपरागत खेती को छोड़कर बाग लगाने के मार्ग पर चले हैं।
15 लोगों को स्थायी रोजगार दिया
किसान फूल कुमार दहिया ने बताया कि नर्सरी फार्म में 15 लोगों को स्थायी रोजगार मिला हुआ है। जबकि 70 से ज्यादा लोगों को बाग में फल तोड़ने व बेचने तथा मंडियों में पहुंचाने का काम मिला हुआ है । बाग एवं नर्सरी के कर्मचारियों का वेतन तथा खर्च को निकाल कर प्रतिवर्ष 10 लाख के लगभग मुनाफा हो रहा है । किसान ने बताया कि वह पूरे दिन नर्सरी फार्म पर बैठकर विभिन्न प्रकार के पौधे तैयार करवाता है।
श्री बालाजी नर्सरी एवं चेयरमैन फ्रूट फार्म दहमान के संचालक किसान फूल कुमार दहिया ने बताया कि पिछले कई दिनों से राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड से बाग पंजीकरण करवाने को लेकर प्रयास चल रहा था। जिसको लेकर वर्ष 2019 में उन्हें मान्यता मिल गई है।
किसान ने बताया कि हरियाणा, पंजाब में हिसार सफेदा कलमी पौधों की अधिक डिमांड बढ़ गई है, उस पर अब काम करना शुरू कर दिया है। क्योंकि उनके पास अमरूद का मदर प्लांट है । मदर पौधों की कलम बनाकर हिसार सफेदा पौध तैयार होती है।
गेंहू व चावल बाजार से खरीदते हैं
किसान फूल कुमार दहिया ने बताया पिछले 12 वर्षों वह अपने परिवार के लिए खाने हेतु गेहूं व चावल बाजार से खरीद कर लाते हैं । फूल कुमार द्वारा परंपरागत खेती को तैयार छोड़कर बागवानी के प्रति रुझान करने के बाद दहमान के कई किसानों में भी परिवर्तन आया है। जिसके बाद अब दहमान में चार नर्सरी फार्म खुल चुके हैं।