टाटा ग्रुप की मूल होल्डिंग कंपनी 'टाटा संस' की शेयर बाजार में संभावित लिस्टिंग को लेकर कॉरपोरेट जगत में हलचल तेज हो गई है। एक तरफ जहां टाटा संस की सबसे बड़ी शेयरधारक 'टाटा ट्रस्ट्स' और उसके चेयरमैन नोएल टाटा इस लिस्टिंग का विरोध कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ शापूरजी पालोनजी (एसपी) ग्रुप के चेयरमैन शापूरजी पालोनजी मिस्त्री ने सार्वजनिक लिस्टिंग का खुलकर समर्थन किया है। मिस्त्री ने टाटा संस की लिस्टिंग को महज एक कॉरपोरेट प्रक्रिया न मानकर इसे 'सामाजिक और नैतिक अनिवार्यता' करार दिया है। उनका कहना है कि सार्वजनिक लिस्टिंग से कंपनी में पारदर्शिता और जवाबदेही मजबूत होगी तथा समाज कल्याण के कार्यों को नई गति मिलेगी। रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (आरबीआई) के हालिया फैसले के बाद अब यह बहस और भी महत्वपूर्ण हो गई है।
टाटा संस को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के 'स्केल-बेस्ड रेगुलेटरी फ्रेमवर्क' के तहत 'अपर-लेयर एनबीएफसी' श्रेणी में रखा गया है। इस नियम के तहत कंपनी के लिए नियत समयसीमा के भीतर शेयर बाजार में लिस्ट होना अनिवार्य है। हालांकि, टाटा संस ने अपनी एनबीएफसी रजिस्ट्रेशन को सरेंडर करने के लिए आरबीआई के पास आवेदन दिया था, जिसे केंद्रीय बैंक ने खारिज कर दिया और कंपनी को जल्द से जल्द आवश्यक नियमों का अनुपालन करने का निर्देश दिया है।
शापूरजी मिस्त्री का मानना है कि टाटा संस का लिस्ट होना केवल शेयरधारकों के लिए ही नहीं, बल्कि देश और समाज के लिए भी फायदेमंद साबित होगा। उन्होंने इसके निम्नलिखित प्रमुख लाभ रेखांकित किए हैं:
पूर्व के मतभेदों को पीछे छोड़ते हुए, शापूरजी मिस्त्री ने टाटा संस, टाटा ट्रस्ट्स, शेयरधारकों और कर्मचारियों से एकजुटता की अपील की है। उन्होंने कहा कि लिस्टिंग के मुद्दे को विवाद का कारण बनाने के बजाय इसे एक ब्रिज के रूप में इस्तेमाल किया जाना चाहिए, जो आपसी सुलह, नए जुड़ाव और संस्थागत मजबूती का जरिया बने।
शापूरजी पालोनजी ग्रुप ने टाटा संस के साथ रचनात्मक रूप से काम करने की प्रतिबद्धता जताई है। मिस्त्री ने भावुक अंदाज में कहा, "मेरे लिए सिद्धांत हमेशा सरल रहा है। हमारा देश सबसे पहले आता है। इसका उद्देश्य किसी एक पक्ष की जीत हासिल करना नहीं, बल्कि टाटा संस्थान को मजबूत बनाना, परोपकार को बढ़ावा देना और राष्ट्र की बेहतर सेवा करना है।"