आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) अब वे काम कर लेता है, जो कभी मैनेजमेंट की पढ़ाई का सबसे खास और जरूरी हिस्सा हुआ करते थे। स्ट्रेटेजी ड्राफ्ट, फाइनेंशियल मॉडल और कॉम्पिटिटिव स्कैन अब मिनटों में हो जाते हैं। ऐसे में MBA करने के फायदों की समीक्षा अब ज्यादा बारीकी से की जा रही है।
सवाल उठता है कि अगर मशीनें बड़े पैमाने पर एनालिसिस कर सकती हैं, तो मैनेजमेंट डिग्री की क्या भूमिका रह जाती है? - इसी सवाल ने भारत में हुए AI Impact Summit के एजेंडा को आकार दिया। समिट में पॉलिसीमेकर्स और इंडस्ट्री लीडर्स को इकोनॉमी पर AI के असर को समझने के लिए बुलाया गया था।
देश के सबसे बड़े AI कन्वर्जेंस (जब AI कई अन्य तकनीकी क्षेत्रों के साथ मिलकर काम करे) में जयपुरिया इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट की मौजूदगी, मैनेजमेंट एजुकेशन और टेक्नोलॉजिकल ट्रांसफॉर्मेशन के बीच एक सोची-समझी अलाइनमेंट के बारे में बताती है।
शिक्षा में AI के इस्तेमाल पर चर्चा को मॉडरेट करने वाले जयपुरिया नोएडा के डायरेक्टर डॉ. शुभज्योति रे ने इसे अच्छे से समझाया। टेक्नोलॉजी, संस्थाओं के काम करने के तरीकों के मुकाबले ज्यादा तेजी से आगे बढ़ रही है। लेकिन, गवर्नेंस और जजमेंट अभी भी इंसान के हाथों में है। उन्होंने चर्चा के दौरान कहा, “हम AI का इस्तेमाल कैसे करते हैं, यह इससे तय होगा कि यह मानवता की सेवा करता है या उसे गुलाम बनाता है।” MBA के लिए इसका मतलब यह है कि भविष्य का मैनेजमेंट एजुकेशन इन्फॉर्मेशन रिकॉल पर AI से मुकाबला नहीं कर सकता। आपको इससे इंटरप्रिटेशन, सिंथेसिस और जजमेंट पर मुकाबला करना होगा।
जयपुरिया के वाइस चेयरमैन श्रीवत्स जयपुरिया ने समिट में इसी बदलाव के बारे में बात की। उन्होंने कहा कि ज्ञान को डेमोक्रेटाइज किया गया है। “अगर सभी के पास एक जैसा ज्ञान है, तो फर्क पर बात होनी चाहिए।” असल में इसका मतलब है कि पहले आउटपुट से आगे बढ़ना, ज्यादा तीखे सवाल पूछना, और अचानक आने वाली परिस्थितियों में निर्णय लेना। ऐसे माहौल में AI-इन्फॉर्म्ड एनालिसिस की जरूरत होती है, लेकिन इसका आउटकम इंसानी जजमेंट ही तय करता है।
Jaipuria Institute of Management का बनाया AI-रेडी MBA/PGDM मॉडल इसी सोच पर आधारित है, जो एक NIRF-रैंक वाला MBA कॉलेज है। इंस्टीट्यूट का यह मॉडल AI-नेटिव के साथ ह्यूमन-सेंट्रिक भी है, जो फैकल्टी की अकाउंटेबिलिटी और मेंटरशिप को बनाए रखते हुए लर्निंग में AI को शामिल करता है। सरल शब्दों में कहें तो यह मॉडल इस सिंपल सोच पर आधारित है कि टेक्नोलॉजी से पढ़ाई या ट्रेनिंग आसान और तेज हो सकती है, लेकिन एक बेहतर लीडर बनने के लिए इंसानों से बातचीत और जुड़ाव ही काम आता है। यह डिजाइन तकनीक के सामान्य इस्तेमाल के बजाय, करिकुलम में किए गए बुनियादी और सोचे-समझे बदलावों को दिखाता है।
करिकुलम और इंडस्ट्री की जरूरतों के बीच का यह तालमेल जयपुरिया के सभी कैंपस में एक जैसा है। हाल के साइकल में, इंस्टीट्यूट ने ₹36 लाख प्रति वर्ष से अधिक का सबसे बड़ा पैकेज और 100% समरटाइम इंटर्नशिप एम्प्लॉयमेंट रेट दर्ज किया गया है। ग्रेजुएट्स को पोर्टफोलियो मैनेजमेंट में सीनियर एनालिस्ट, एडवाइजिंग में बिजनेस एनालिस्ट, लीडरशिप पाइपलाइन पर मैनेजेरियल ट्रेनी और प्रॉफिट और लॉस अकाउंटेबिलिटी वाले टेरिटरी मैनेजर के तौर पर नौकरी मिली। हायरिंग प्रोसेस में BlackRock, Deloitte, Genpact, ICICI Bank और फाइनेंशियल सर्विसेज, कंसल्टिंग, FMCG और रिटेल ऑपरेशंस की 275 से ज्यादा कंपनियों के रिक्रूटर्स ने हिस्सा लिया।
PGDM/MBA 2026-28: प्रोग्राम की जानकारी
एक्रेडिटेशन और रैंकिंग:
PGDM/MBA 2026–28 प्रोग्राम के लिए आवेदन शुरू हो चुके हैं।