ज्ञानपुर। सार्वजनिक वितरण प्रणाली को चुस्त-दुरुस्त और पारदर्शी बनाने के लिए एसएमएस एलर्ट की व्यवस्था शुरू कर दी गई है। फूड सिविल सप्लाई उत्तर प्रदेश (एफसीएसयूपी) योजना के तहत प्रत्येक कोटे की दुकान के 10-10 प्रबुद्ध लोगों के मोबाइल नंबर पर खाद्यान्न उठान की सूचना भेजी जाएगी। ताकि यह पता चल सके कि उनका कोटेदार कितना खाद्यान्न, चीनी और केरोसिन गोदाम से उठाया है।
कोटेदारों की मनमानी पर लगाम लगाने के लिए शासन ने नई व्यवस्था शुरू कर दी है। इससे कोटेदारों की मनमानी पर शिकंजा कस सकेगा और वह समय से खाद्यान्न, मिट्टी का तेल और चीनी आदि का वितरण करेंगे। उपभोक्ताओं को जानकारी देने के लिए शासन ने प्रत्येक कोटे की दुकानों के 10-10 प्रबुद्ध उपभोक्ताओं को मोबाइल से मैसेज भेजा जाएगा। मैसेज में यह जानकारी दी जाएगी कि उनके कोटेदार ने आज कितना गेहूं, चावल, चीनी और केरोसिन का उठान गोदाम से किया है। इन दस प्रबुद्ध कार्डधारकों में गांव के प्रधान, एक पूर्व प्रधान सहित गांव के अन्य आठ प्रबुद्ध लोग शामिल हैं। आए दिन कोटेदारों के खिलाफ विभाग को शिकायत मिल रही थी कि वह समय से खाद्यान्न और तेल आदि का वितरण नहीं करते हैं। कोटेदार गोदाम से सामग्री न मिलने का बहाना बनाकर पूरा महीना गुजार देते थे। इसके कारण लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता था। चीनी और दाल आदि का वितरण तो शायद ही किसी कोटेदार के द्वारा नियमित रूप से किया जाता है। कालाबाजारी रोकने और सार्वजनिक वितरण प्रणाली को पटरी पर लाने के लिए शासन ने यह व्यवस्था की है। ताकि लोगों को सामग्री उठते ही मालूम हो जाए और वह लोगों को जानकारी देकर कोटे की दुकान से सामान समय से ही प्राप्त कर सकें। वितरण प्रणाली को दुरुस्त करने के लिए शासन ने पूर्व में डोर स्टेप डिलेवरी योजना की भी शुरुआत की थी। इस योजना को मिर्जापुर, सोनभद्र और चंदौली में प्रयोग के तौर पर शुरू किया गया था। इसके तहत कोटेदारों को खाद्यान्न और अन्य रसद सामग्री उनके दुकान तक पहुंचाई जाती थी। तमाम खामियों के चलते यह प्रयोग असफल रहा, जिससे इस योजना को बंद कर दिया गया था। अब शासन ने एसएमएस एलर्ट के जरिए लोगों को जानकारी देने की व्यवस्था शुरू की है। यह व्यवस्था कितनी कारगर व सार्थक सिद्ध होती है यह तो समय ही बताएगा। फिलहाल शासन डाल डाल तो कोटेदार पात-पात चल रहे हैं। शासन जिस भी नई व्यवस्था को चालू कर वितरण प्रणाली को पटरी पर लाने का प्रयास करता है, लेकिन कोटेदार हर व्यवस्था का काट निकालकर कार्डधारकों के हक पर डाका डालने से नहीं चूकते हैं।