बदायूं। उसहैत थाना क्षेत्र के कटरा सआदतगंज इलाके में दो नाबालिग बहनों की गैंग रेप के बाद हत्या और उनको पेड़ पर लटकाने की घटना ने बदायूं के चेहरे पर एक बार फिर कालिख फिर पोत दी। घटना दबंगई और हैवानियत की दास्तां साफतौर पर बयां करती है। इससे पहले 16 दिसंबर, 2012 दिल्ली के दिल दहला देने वाले गैंगरेप में बदायूं का नाम आया। उस समय पहली बार पूरी दुनिया में बदायूं की बदनामी हुई थी। निर्भया के साथ दरिंदगी करने वाले छह लोगों में एक आरोपी बदायूं के इस्लामनगर क्षेत्र का था। निर्भया कांड के बाद महिलाओं पर अत्याचार के खिलाफ देश में इतिहास का सबसे बड़ा जन आंदोलन हुआ। लोग एकजुट हुए तो सरकार ने सिस्टम भी बदला। बावजूद इसके बेटियां अब भी सुरक्षित नहीं हुईं।
कटरा सआदतगंज इलाके में 27 मई को दो चचेरी बहनों की गैंगरेप के बाद हत्या और शव पेड़ पर लटकाए जाने की घटना ने देश को झकझोर दिया है। यही नहीं, मामले में खाकी ने कानून को कदमों तले रौंदा कर बदायूं को पूरी दुनिया के सामने शर्मशार कर दिया।
सोशल मीडिया पर छाया हुआ है कांड
बदायूं। फेसबुक, ट्विटर, व्हाट्स एप पर भी यह मामला छाया हुआ है। गैंगरेप के बाद आम के पेड़ पर लटकाए गए दोनों बहनों के शवों वाला फोटो अब सोशल मीडिया पर पूरे देश के लोगों का दिल दहला रहा है। सोशल मीडिया पर चर्चाओं के बीच लोग इस पर अपनी प्रतिक्रियाएं भी दे रहे हैं। ज्यादातर प्रतिक्रियाएं उत्तर प्रदेश की कानून व्यवस्था के खिलाफ हैं।