बदायूं। बगदाद में शेख उसैदुल हक की शहादत के बाद उनके पिता जिला काजी हजरत सालिमुल कादरी शनिवार को बदायूं लौट आए। उनके साथ गए अन्य मुस्लिम विद्वान भी वापस आ गए। दरगाहे कादरी से लेकर मदरसे तक मुरीदों की भारी भीड़ जुटी। शेख साहब की शख्सियत याद करते हुए लोगों की आंखें नम हो गईं।
हाल ही में बगदाद में आतंकी हमले के दौरान जिले के नायब काजी शेख उसैदुल हक शहीद हो गए। इनके साथ बैठे विद्वान अब्दुल कय्यूम के पैरों में छर्रे लगे थे। जबकि पीछे कार में चल रहे जिला काजी हजरत सालिमुल कादरी तथा अन्य विद्वान बाल-बाल बचे थे। शेख साहब के शव को बगदाद स्थित बड़े पीर की दरगाह में ही सुपुर्देखाक कर दिया गया। शुक्रवार को जिला काजी तथा अन्य विद्वान फ्लाइट से दिल्ली आए। वहां से शनिवार सुबह यह लोग बदायूं पहुंचे। कुछ वक्त आवास पर बिताने के बाद यह लोग दरगाहे कादरी पहुंचे। जिला काजी के साथ बगदाद गए उनके पुत्र अतीफ मियां कादरी भी यहां थे। उनके छोटे पुत्र अज्जाम कादरी तथा दरगाह के प्रवक्ता तसनीम हसन कादरी की भी मौजूदगी रही।
दरगाह में जिला काजी को सांत्वना देने शहर समेत जिले भर के सैकड़ों मुरीद यहां पहुंचे। वक्फ विकास निगम के उपाध्यक्ष आबिद रजा खां, पूर्व सांसद सलीम इकबाल शेरवानी, कांग्रेस जिलाध्यक्ष ओमकार सिंह, महेश सक्सेना तथा आमिर सुल्तानी ने भी यहां पहुंचकर गम का इजहार किया। जिला काजी ने कहा कि शेख साहब का निधन उनके परिवार की क्षति नहीं, बल्कि उर्दू अदब और साहित्य की क्षति है। उन्होंने मुरीदों को यह कहकर दिलासा दी कि शेख साहब गौस पाक के ज्यादा करीब थे। इसलिए उन्होंने उन्हें अपने ही पास रोक लिया। इस बीच मुरीदों की आंखें नम हो गईं।
शोक की खबर का जोड़
वजीरगंज। शहीदे बगदाद हजरत शेख उसैदुल हक की याद में सैदपुर के मुहल्ला सादात में एक जलसे का आयोजन किया गया। इसमें हाजी मन्नान कादरी बदायूंनी ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। सदारत आल इंडिया उलेमा मशायख बोर्ड के सदर मुफ्ती सैयद वसीम अशरफ ने की। जलसे में तिलावत के बाद नातख्वानी की गई। निजामत सैयद आतिफ सैदपुरी ने की।