कछला गंगा घाट के निकट का इलाका भी संवेदनशील
घटत-बढ़त के चलते एक बार फिर गंगा में उफान
पानी के घटने-बढ़ने से तटों के कटने का खतरा
बदायूं। जिले में गंगा से बाढ़ का खतरा अभी टला नहीं है। मध्य जून से ही गंगा ने तीखे तेवर दिखाने शुरू कर दिए थे। इस बीच सर्वाधिक छह लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से गंगा में उफान आ गया था। इसके बाद से पानी लगातार घट-बढ़ रहा है। माना जा रहा है कि कांवड़ मेला तक गंगा घटती बढ़ती रहेंगी। इससे तटों के कटान का खतरा अधिक है। अब तक शांत रही गंगा एक बार फिर सोमवार को उफन गई। नरौरा से सोमवार को 1.8 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ दिया गया है।
कांवड़ मेला निकट है और गंगा में बाढ़ का खतरा बढ़ने लगा है। नरौरा डैम से शाम चार बजे 1,08,443 क्यूसेेक पानी छोड़ दिया गया है। बिजनौर डेम से भी करीब सवा लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने की सूचना है। गंगा के जलस्तर में घटा-बढ़ी का खेल जारी है तो बाढ़ की संभावना से भी इंकार नहीं किया जा सकता है। बाढ़ खंड अधिकारी मानते हैं कि बाढ़ के समय हुसैनपुर बांध और कछला के आसपास का इलाका संवेदनशील है।
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कछला गंगा घाटों पर कटान का खतरा
सबसे खतरनाक बात यह है कि कांवड़ मेला कछला घाट पर होना है। गंगा में पानी के घटते-बढ़ते क्रम में कटान भी तेजी से होता है। कांवड़ मेला के समय तक यही हाल रहे तो स्नानार्थियों को सचेत करना जरूरी होगी। कटान में घाटों पर भी स्नान खतरा भरा होता है। वैसे भी गंगा में इस समय पानी ज्यादा है। मीटरगेज पर गंगा का जलस्तर 163.40 नापा गया है।
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फिलहाल, पानी की गति के अनुसार कटान का खतरा नहीं है लेकिन आगे गंगा के पानी के रुख को देखकर कुछ कहा नहीं जा सकता। गंगा घाटों पर भी कटान का खतरा फिलहाल नहीं है लेकिन इसके बावजूद कटान के हालातों का ध्यान रखते हुए उनकी टीम कांवड़ मेला तक गंगा की स्थिति पर पूरी नजर रखेगी।
-डीके जैन, एक्सईएन बाढ़ खंड
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सोमवार को गंगा की स्थिति
मीटर गेज पर गंगा का जलस्तर-163.40
नरौरा डैम से छोड़ा गया पानी-1,08,443 क्यूसेक
बिजनौर डैम से छोड़ा गया पानी-1,24,412 क्यूसेक
हरिद्वार डैम से छोड़ा गया पानी-1,18,693 क्यूसेक