बदायूं। जिले में रेडियोलोजिस्ट की डिग्री किसी के पास नहीं है, लेकिन तीन दर्जन से अधिक नर्सिंग होम में अल्ट्रासाउंड केंद्र चल रहे हैं। इन पर धड़ल्ले से अल्ट्रासाउंड किए जा रहे हैं। बताया जाता है कि स्वास्थ्य विभाग की मेहरबानी के कारण इनका संचालन हो रहा है। विभाग के अफसर हर माह निरीक्षण के नाम पर कागजी कोरम पूरा कर रहे हैं।
शासन ने छह माह पूर्व स्वास्थ्य विभाग से जानकारी मांगी थी कि जिले में सरकारी-प्राइवेट अस्पतालों में कितने रेडियोलोजिस्ट तैनात हैं। विभाग ने इसका भेजा था कि यहां कोई तैनात नहीं हैं। सूत्र बताते हैं कि अल्ट्रासाउंड केंद्रों की संख्या भी जानी थी, लेकिन महकमे के अधिकारियों ने गोलमोल कर रिपोर्ट भेजी थी। सूत्र बताते हैं कि अधिकांश अल्ट्रासाउंड केंद्रों पर गैर कानूनी कार्य हो रहे हैं, उन पर प्रतिबंध भी लगा हुआ है। हालांकि कई नर्सिंग होम के संचालकों का कहना है कि उनके पास अनुभव प्रमाण पत्र हैं। सूत्र बताते हैं अनुभव प्रमाण पत्र छह माह का होना चाहिए, लेकिन वह नहीं है। महकमे के अफसर हर माह निरीक्षण के नाम पर कागजों का पेट भर रहे हैं। बताया जाता है कि एक नर्सिंग होम पर रेडियोलोजिस्ट तैनात हैं, लेकिन उनका नाम विभाग ने अपने कागजों में दर्ज नहीं किया। इसी कारण कागजों के अनुसार रेडियोलोजिस्ट की संख्या शून्य है।
सीएमओ डॉ. सुखबीर सिंह का कहना है कि जिले में सरकारी-प्राइवेट अस्पतालों में एक भी रेडियोलोजिस्ट नहीं है। इसकी रिपोर्ट पहले शासन को भेजी जा चुकी है। नर्सिंग होम में चल रहे अल्ट्रासाउंड केंद्रों का निरीक्षण किया जाएगा। यदि मानक के अनुसार कार्य नहीं होता पाया तो कार्रवाई होगी।