'कुछ ही दिनों में उसने मर्दों को 'खुश' करना सीख लिया'

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अमर उजाला, दिल्ली

call girls by dr promila kapoor

ये अंश भारत की जानी-मानी समाजशास्‍त्री और लेखिका डॉ. प्रोमिला कपूर द्वारा रचित उपन्यास 'कॉल गर्ल्स' से लिया गया है। 'कॉल गर्ल्स' समाज की वेश्याओं पर आधारित है। इसमें सभी प्रकार की अनेक कॉलगर्ल्स के लंबे इंटरव्यू लिए गए हैं जो आश्चर्यजनक तथ्यों को सामने लाते हैं।जानें, 'ब्रा' से जुड़े कई हैरान करने वाले सचअरूणा ने स्वीकार किया, बहुत शीध्र ही उसे उस स्‍त्री द्वारा, जो उसे होटल में नौकरी के लिए ले गई थी, यह पता चल गया था कि यह जो कुछ भी काम उसे होटल में करना पड़ रहा था वह उसकी नौकरी का ही एक हिस्सा था और यह भी कि यदि वह पुरुषों को संभोग सुख देती रहेगी तो वह काफी पैसा कमा सकेगी।देखिए, आखिर क्यों कपड़े उतार पहाड़ों पर चढ़ रही हैं लड़कियां?तो भी, उसने नौकरी न छोड़ने का ही फैसला किया क्योंकि उतना पैसा जिसकी उसे बहुत सख्त जरूरत थी, मिलने पर वह वास्तव में अभिभूत हो गई थी और इसीलिए भी क्योंकि कम से कम थोड़ी देर के लिए उसने यह भी महसूस किया था कि किसी को उसकी चाह थी, उसकी जरूरत थी, उसके लिए प्यार था। एक पुरुष की बांहों के सहारे में ही वह चन्द क्षणों के लिए ही सही पर सुरक्षित महसूस करती।देखिए, खुद को खूबसूरत क्यों नहीं मानती ये लड़कीसो यह जानते हुए भी कि उसे उस नौकरी में क्या-क्या काम करना पड़ेगा, वह उसी नौकरी में लगी रही। जब एक पुरुष चला जाता तब मुझे दूसरा का कमरा बता दिया जाता और कुछ ही दिनों में उसने उन पुरुषों को 'खुश' करना सीख लिया और उनसे हर 'मुलाकात' का मैनेजर उसे 100 रूपये देता।उसने कहाः ''इसमें कोई शक नहीं कि शुरू-शुरू में मुझे अक्सर लगता था कि मैं गलत काम कर रही थी परन्तु इसमें से निकलने का रास्ता भी कहां था? मैं हर महीने पांच सौ से सात सौ रूपया तक कमा रही थी जिसकी अपने और अपने बच्चों के रहने खाने पहनने के लिए मुझे सख्त जरूरत थी। मैं यह भी जान चुकी थी कि विधवा होने के नाते कोई मुझसे इज्जत से शादी नहीं करेगा।पढ़िए, प्रेगनेंसी से बचने के चक्कर में हो ना जाएं ये बीमारियांमुझे यह भी मालूम था कि पढ़ी-लिखी न होने के कारण कोई इज्‍ज्तदार अच्छे पैसों वाली नौकरी भी मुझे मुश्किल से ही मिलेगी। और मैंने यह भी देख लिया था कि एक बेसहारा विधवा को समाज कितनी धृणा करता है और कैसे उसकी बेसहारा होने की स्थिति का लाभ उठाता है और कैसे चारों ओर से उसका बहिष्कार किया जाता है। इसीलिए मैंने धीरे-धीरे यही काम करते रहना मंजूर कर लिया और मैंने सोचा, क्यों न शरीर बेचकर कम से कम पैसे ही कमा लूं। जब तक यह शरीर बिकने लायक रहता है।''देखिए, इस साल ये सेक्स टॉयज लुभाएंगे आपकोबाद में जब अरूणा को एक ग्राहक से ही पता चला कि उसे एक बार ग्राहक के कमरे में भेजने के लिए होटल वाले ग्राहक से तीन सौ से पांच सौ रूपये तक लेते थे, तब उसने जिद की कि उसे ‌अधिक पैसे मिलने चाहिए। इस पर वह उसे उसमें से आधे पैसे देने के लिए मान गए बशर्ते कि जिस वक्त भी उसे आने को कहा जाए, वह आ जाए और जरूरत पड़ने पर ग्राहक के साथ रातभर बिताने को तैयार हो। उसने बताया कि रात ‌को उसको अपनी बेटियों को अकेली छोड़ने की समस्या थी।पढ़िए, इन लड़कियों के ब्रेस्‍ट वरदान नहीं, अभिशाप हैं
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Tags: call girls novel , dr promila kapoor , relationship books ,

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