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बेरहम मौसम बेहाल किसान: चाय बागान में कीटों का प्रकोप, असमय बारिश से बढ़ा नुकसान

मनीष मिश्र, अमर उजाला, नई दिल्ली। Updated Wed, 15 Jul 2020 05:49 AM IST
चाय बागान
चाय बागान - फोटो : सोशल मीडिया

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सार

  • जलवायु परिवर्तन व गर्मी बढ़ने से कीटों का हमला बढ़ गया 
  • इसके साथ ही कीटनाशक के छिड़काव से निर्यात में दिक्कत

विस्तार

मानसून के दौरान बाढ़ और बढ़ता तापमान से चाय के बागान वालों के लिए खतरे की घंटी साबित हो रहा है। चाय बागान में लगने वाला रेड स्पाइडर माइट (कीट) मार्च-अप्रैल में लगता था, वो अब पूरे साल नुकसान पहुंचाने लगा है।
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असम और सिलिगुड़ी के चाय बागान मालिकों को बदलते मौसम से होने वाले नुकसान को अपने खेतों में दिखने लगा है। जलवायु परिवर्तन से बढ़े तापमान का असर यह हुआ कि तरह-तरह के कीटों का हमला बढ़ गया और इन कीटों से बचाने के लिए काफी अधिक मात्रा में कीटनाशक के छिड़काव से चाय के निर्यात में भी दिक्कत आ रही है।
पश्चिम बंगाल के सिलिगुड़ी में चाय के बागान के मालिक शिव के. सरिया पिछले कुछ वर्षों से जलवायु परिवर्तन के असर से होने वाले नुकसान को झेल रहे हैं। वह बताते हैं, ‘वातावरण का तापमान बढ़ने से पूरे साल कीट-पतंगों का हमला होता है, जिसके लिए कीटनाशक का छिड़काव करना पड़ता है।
जैसे टी मास्क्यूटो बग (टीबीजी) फसल को काफी नुकसान पहुंचा रहा है, यह पत्ती में जहर डाल देता है और पत्ती को तोड़ा नहीं गया तो पूरे पौधे को नष्ट कर देता है। इसी तरह से रेड स्पाइडर कीट और लूपर कैटर पिलर भी नुकसान पहुंचा रहे हैं।’

वहीं, शिव के सरिया कहते हैं, ‘पहले दिसंबर से मार्च के बीच बारिश हो जाती थी, लेकिन अब बहुत कम होती है। जबिक सालभर में होने वाली कुल बारिश उतनी ही है, जो मानसून सीजन में अधिक होने पर बाढ़ का रूप ले लेती है।’  
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