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विशेषज्ञ की सलाह: इस तरह पौध का उत्पादन करें किसान

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, धर्मशाला Published by: अरविन्द ठाकुर Updated Mon, 26 Aug 2019 05:00 AM IST
डॉ. विशाल डोगरा कृषि विवि पालमपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय में प्रधान वैज्ञानिक हैं।
डॉ. विशाल डोगरा कृषि विवि पालमपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय में प्रधान वैज्ञानिक हैं। - फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल की जलवायु सब्जियों के उत्पादन के लिए अत्यधिक अनुकूल है। प्रदेश के किसान बेमौसमी सब्जियों का उत्पादन कर अपनी आर्थिकी सुदृढ़ कर रहे हैं। किसान गोभीवर्गीय सब्जियों को प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों में वर्ष भर उगा सकते हैं। इससे इनकी उपलब्धता वर्ष भर बाजार में रहती है। प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों की उपज तो बेमौसमी तैयार होती है, लेकिन मध्य एवं कम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में अच्छी आमदन प्राप्त करने के लिए अगर इन्हें समय से पूर्व पैदा किया जाए तो प्रदेश के सब्जी उत्पादकों को बहुत अच्छे दाम हासिल हो सकते हैं। 



गोभीवर्गीय फसलें विटामिन ए और सी का उत्तम स्रोत हैं। इनमें खनिज लवण जैसे फासफोरस, पोटाशियम, कैल्शियम, लोहा एवं सोडियम भी भरपूर मात्रा में पाया जाता है। प्रदेश में गोभी वर्गीय फसलों में मुख्य रूप से फूलगोभी, बंदगोभी, गांठ गोभी, ब्रोकली एवं चाइनीज बंदगोभी बड़े स्तर पर पैदा की जा रही है। प्रदेश के मध्य पर्वतीय क्षेत्रों में वर्षा ऋतु अगस्त माह तक चलती है और अत्यधिक वर्षा के कारण खुले में पौध उत्पादन संभव नहीं है।


हरित गृह अथवा पॉली टनल में ही पौध उत्पादन करना चाहिए। पनीरी उगाने के लिए साधारणतया तीन मीटर लंबी, एक मीटर चौड़ी और 10-15 सेंटीमीटर ऊंची क्यारियां पौध उत्पादन के लिए बनानी चाहिए। प्रत्येक क्यारी में 20-25 किलोग्राम खूब गली-सड़ी गोबर की खाद सहित अन्य खादें भी डालनी चाहिए। इसके बाद फफूंदनाशक उपचारित बीज को पंक्तियों में पांच सेंटीमीटर की दूरी पर लगाकर गोबर खाद या मिट्टी की पतली तह से ढक दें।

संभव हो तो क्यारी को सूखी घास या पॉलिथीन चादर से ढक दें। अधिक घनी बिजाई होने पर कमरतोड़ रोग की संभावना बढ़ जाती है। क्यारियों की हल्की सिंचाई करते रहें। बीज का अंकुरण (3-5 दिन) में होने के बाद पॉलीथीन चादर हटा दें। हर सप्ताह खरपतवार निकालें और हल्की निराई-गुड़ाई करते रहें। 25 से 30 दिन बाद पौधरोपण योग्य हो जाते हैं। पौध को उखाड़ने से एक घंटा पहले सिंचाई करें।

तभी पौध को उखाड़ें, ताकि पौधों की जड़ें सुरक्षित रहें। स्वस्थ पौध का रोपण सदैव सायंकाल में ही करें तथा रोपाई के बाद तुरंत सिंचाई कर दें। खरपतवार किसी भी फसल में पैदावार कम करने में अपनी भूमिका निभाते हैं, इनका उचित समय पर नियंत्रण अति आवश्यक है। खरपतवार नाशक दवाई का छिड़काव पौध रोपण से 1-2 दिन पहले कर दें।

फसल में दो से तीन बार निराई-गुड़ाई करें। फूलगोभी तथा बंदगोभी में फूल बनना आरंभ होने के समय पौधों के चारों ओर मिट्टी चढ़ाएं। 7-10 दिन के बाद सिंचाई करते रहें। पत्तों की निचली सतह पर हरे रंग के छोटे-छोटे कीट पैदा हो जाते हैं, जो पत्तों का रस चूसते हैं, जिससे पत्ते मुड़ जाते हैं।
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इस कीट के नियंत्रण के लिए फसल पर कीटनाशक दवाई का अवश्य छिड़काव करें। छिड़काव को 15 दिन के अंतराल पर दोहराते रहें, जबकि तुड़ाई के सात दिन पहले छिड़काव रोक दें। नवरोपित पौधों की रोएंदार जड़ों और छाल पर लाल चींटी और कीट पलते हैं, जिससे पौधे सूखकर मर जाते हैं। लाल चींटी के नियंत्रण के लिए रोपाई के समय दवाई का छिड़काव करें।

डॉ. विशाल डोगरा कृषि विवि पालमपुर के प्रसार शिक्षा निदेशालय में प्रधान वैज्ञानिक हैं। वह पिछले 22 वर्षों से सब्जियों के क्षेत्र में अनुसंधान और प्रसार कार्य कर रहे हैं। इससे पहले वे कृषि विज्ञान केंद्र कांगड़ा के प्रमुख के रूप में भी सेवाएं दे चुके हैं।

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