बेहतर अनुभव के लिए एप चुनें।
TRY NOW

रसूल की हयात-ए-जिंदगी से कराया रूबरू

Rampur Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन

पढ़ें अमर उजाला ई-पेपर
कहीं भी, कभी भी।

रामपुर। अजमत-ए-रसूल कांफभनेंस में इस्लाम विरोधी फिल्म को लेकर गमो-ओ-गुस्से का इजहार किया गया। किसी भी मजहब के पैगंबर की शान में गुस्ताखी करने वालों को सख्त सजा दिलाने को कानून बनाने का मुतालबा किया गया। उलमा और दानिश्वरों ने हुजूर सल्लल्लाहो अलैह वसल्लम की हयात-ए-जिंदगी से रूबरू कराया।
विज्ञापन

किला मैदान में कांफभनेंस का आगाज कुरान की तिलावत से किया गया। इसमें मुतालबा किया गया कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऐसा कानून बने, जिसमें किसी मजहब के रहनुमा और महापुरुषों का अपमान करने वालों को कड़ी सजा मिल सके। उलमा और दानिश्वरों ने कहा कि पैगंबरों की तालीम एक मात्र रास्ता है। उस पर चलकर दुनिया को बेहतरी की तरफ ले जाया जा सकता है। बिना किसी भेदभाव के हर समुदाय और मजहब के लोग पैगंबरों की तालीम के मुताबिक जिंदगी गुजारें। बहराइच के इस्लामिक स्कालर डा. अनीस अहमद ने कहा कि शैतानी ताकतें पैगंबरों की तालीम से ध्यान हटाने को घिनौनी हरकत कर रही हैं। दिल्ली के सैयद अशरफ ने कहा कि पैगंबरों की तालीम से ही इंसान को दुनिया और आखिरत में निजात मिलती है। मौलाना अब्दुल खालिक नदवी और अब्दुल्ला तारिक ने नबी की हयात-ए-जिंदगी से रूबरू कराया। उनके उसूलों पर अमल की ताकीद की। सदारत शहर इमाम मौलवी महबूब अली और निजामत नौमान खां गाजी ने की। इसमें मौलाना असलम जावेद कासमी, शिया इमाम अली रजा नकवी भी थे। आयोजक डा. मुहम्मद यूनुस ने सभी का शुक्रिया अदा किया।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
Election
  • Downloads

Follow Us