असम हिंसा को लेकर उलमा ने निकाला शांति मार्च

Rampur Updated Sun, 26 Aug 2012 12:00 PM IST
टांडा। जमीयत उलमा-ए हिंंद-से जुड़े उलमा ने नगर के सदर बाजार में शांति मार्च निकाल कर प्रधानमंत्री को संबोधित मांग पत्र तहसीलदार को सौंपा। इसमें अकलियत के महफूज और मुस्तकिल इंतिजाम करने और फिरकापरस्तों का असलह जब्त करने की मांग की है। उलमा ने मुख्यमंत्री पर अविश्वास प्रकट किया है।
असम में हजारों लोगों के बेघर होकर शिविर में रहने और पर्याप्त मदद नहीं मिलने पर तथा तरुण गोगोई सरकार असम में अकलियत की हिफाजत में असफल रहने पर उलमा में गुस्सा है। जुमे की नमाज के बाद अमन की दुआ की गई। शिविरों में बेसहारा लोगों की मदद के लिए चंदा एकत्र किया गया। जमीयत के अध्यक्ष हाफिज मुहम्मद जमील के नेतृत्व में उलमा ने सदर बाजार में शांति मार्च निकाला। शांति मार्च जामा मसजिद से शुरू होकर सदर बाजार, मिर्च मंडी, सर्राफा बाजार, मुख्य चौराहा होकर तहसील पहुंचा। जमीयत की ओर से प्रधानमंत्री को संबोधित मांग पत्र तहसीलदार प्रभु दयाल को सौंपा। मांग पत्र में असम को बरबाद करने वालों के खिलाफ कड़ाई करने, उपद्रवियों के हथियार जब्त करने, शिविरों में रह रहे परिवारों को पर्याप्त खाने पीने और इलाज का बंदोबस्त करने पीड़ित परिवारों को मुआवजा देने और मुख्यमंत्री से फसाद काबू में नहीं करने पर जवाब तलब करने की मांग की गई है। पत्र में बर्मा में कत्लेआम रोकने को प्रधानमंत्री से प्रभाव का प्रयोग करने की मांग की। नायब सदर मौलाना लियाकत अली, महासचिव मौलाना मोहम्मद इरफान, डाक्टर मोहम्मद आरिफ, मौलाना मोहम्मद सलीम नाजिम मदरसा रोजातुल उलूम, मौलाना जहीरुल इस्लाम, कारी अब्दुल रशीद, कारी मोहम्मद मारूफ, मौलाना मोहम्मद फहीम, कारी मोहम्मद फुरकान, मौलाना मोहम्मद अकरम, कारी मोहम्मद अजीम, हाफिज मोहम्मद असलम, मौलाना मोहम्मद सगीर, मौलाना मोहम्मद फाहिम, मौलाना हुसैन अहमद, मौलाना मोहम्मद उसमान मिफ्ताही, मौलाना अब्दुल मन्नान, मौलाना शौकत अली मौजूद थे।

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