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भोलेनाथ की भक्ति में डूब गया शहर

Rampur Updated Tue, 31 Jul 2012 12:00 PM IST
रामपुर। भोर की पहली किरण के साथ ही घंटे-घड़ियालों की आवाज और हर-हर महादेव के नारों के साथ शिवालयों केकपाट खुलते ही जलाभिषेक कार्यक्रम शुरू हो गया। हजारों कांवड़िए दोपहर बाद तक शिवालयों में जलाभिषेक करते रहे। मंदिरों में शाम तक बम-बम भोले का उद्गार गूंजता रहा।
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सावन केअंतिम सोमवार को शिवशंकर को प्रसन्न करने को हजारों कांवड़िए शिवालयों में जुट गए। ब्रजघाट और हरिद्वार से पदयात्रा कर लेकर आए गंगाजल की कांवड़ से शिवालयों में भोर की पहली किरण के साथ ही जलाभिषेक कार्यक्रम का शुभारंभ हो गया। घंटे-घड़ियाल, शंख की ध्वनि और हर-हर महादेव के जयकारों केसाथ कांवड़िओं ने शिवलिंग पर कांवड़ चढ़ानी शुरू कर दी। मंदिरों में चारो ओर सिर्फ सिर ही सिर नजर आ रहे थे। सुनाई दे रहा था तो सिर्फ बम-बम भोले का उद्गार और भोलेनाथ केजयकारे। इनके बीच नन्हे-मुन्ने और महिला कांवड़िओं को जलाभिषेक के लिए पहले मौका दिया गया। भमरौआ स्थित पातालेश्वर प्रकटेश्वर शिवालय में भक्तों की भारी भीड़ जुट गई। शहर के अलावा आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के भी शिवभक्त शिवलिंग के जलाभिषेक को इस शिवालय में पहुंच गए। मंदिर से आधा किलोमीटर की दूरी तक भी सिर्फ कांवड़िए ही नजर आ रहे थे। ऐसा ही पंजाब नगर स्थित नर्मदेश्वर मंदिर में भी भक्क्तों की भारी भीड़ जुटी रही। इनकेअलावा शहर केसभी शिवालयों में दोपहर बाद तक कांवड़िए जलाभिषेक में जुटे रहे। भक्ति में चूर सभी कांवड़िए अनुशासित तरीके से मंदिरों में जुटकर एक-दूसरे का सहयोग करते भी दिखे।
शिवालयों में देर शाम तक कांवड़िए आकर जलाभिषेक करते नजर आए। सड़कों पर इक्का-दुक्का शिवभक्त दोपहर बाद तक कांवड़ लेकर आते नजर आए। हिंदू महासंघ के जिलाध्यक्ष संजय गुप्ता ने बताया कि कुछ भक्त सावन के अंतिम दिन रक्षाबंधन तक कांवड़ लेकर आते हैं। इस वर्ष पिछले वर्षों के मुकाबले कांवड़ियों की संख्या अधिक हुई है।

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