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देर रात तक नहीं मिल सकी चांद की शहादत

Rampur Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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रामपुर। मुकद्दस रमजान के चांद की शहादत देर रात तक नहीं मिल सकी। लोगों के रमजान के ऐलान का इंतजार था। मगरिब बाद लोगों ने चांद देखने की कोशिश की पर उन्हें मायूसी हाथ लगी।
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माह शाबान की 29 तारीख थी। सभी को चांद दिखाई देने की उम्मीद थी। लेकिन आसमान साफ नहीं था। मगरिब की नमाज के बाद लोगों ने उन्नीतसवीं शब का चांद देखने की कोशिश की। किसी ने जामा मसजिद की छत से तो किसी ने इमारतों से चांद देखने का प्रयास किया। चांद नजर नहीं आया तो लोगो ने उलमा से राबता कायम किया। उलमा को तस्दीक मिलने का इंतजार था। जामा मसजिद इंतजामिया कमेटी ने चांद की शरई शहादत के लिए कुछ लोगों को नैनीताल, मुरादाबाद, पीलीभात बरेली रवाना कर दिया था। मगरिब से इशा बाद तक शहर काजी सैयद खुशनूद मियां, शहर इमाम मौलवी महबूब अली, जामा मसजिद के इमाम मौलवी मजाहिर उल्लाह खां, इंतजामिया के कमेटी के सदर नजाकत खां, सेकेट्ररी मुकर्रम रजा खां जामा मसजिद में ही मौजूद रहे। इशा बाद काफी लोग भी जामा मसजिद में जमा हो गए थे। उलमा का कहना था कि शरई शहादत मिलने के बाद ही चांद का ऐलान किया जाएगा। ऊहापोह की स्थिति में तरावीह की नमाज भी अदा नहीं की गई।

काजी-ए-शरआ सैयद शाहिद अली रजवी भी चांद की तस्दीक का इंतजार करते रहे। उन्होंने भी चांद की शरई शहादत के लिए कुछ लोगों को दिल्ली, हल्द्वानी, लखनऊ, बरेली, मुरादाबाद पहले ही भेज दिया था। काजी- ए- शरआ खुद भी दूसरे जिलों से राबता कायम रखे रहे।

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