विज्ञापन

कब बरसेगी आसमान से राहत

Rampur Updated Sun, 01 Jul 2012 12:00 PM IST
विज्ञापन
रामपुर। खेतों में धूल उड़ रही। किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। मानसून की बेरुखी से किसान धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। कुछ दिन और यही हालात रहे तो करीब चालीस फीसदी धान की पैदावार घट जाएगी।
विज्ञापन
जिले में इस बार 1.40 लाख हेक्टेअर में धान का आच्छादन लक्ष्य रखा है। आच्छादन लक्ष्य हासिल करने के लिए प्रशासन ने काफी पहले प्लान तैयार कर लिया था। किसानों ने भी धान की नर्सरी वक्त पर तैयार कर ली, लेकिन मानसून की बेरुखी से धान की रोपाई नहीं कर पा रहे हैं। बारिश के इंजतार में किसानों की निगाहें आसमान पर टिकी हैं। पिछले साल 30 जून तक करीब चालीस फीसदी धान की रोपाई हो चुकी थी। लेकिन, अबकी बार दस फीसदी रोपाई हो सकी है। सिंचाईं का सरकारी सिस्टम भी किसानों को धोखा दे रहा है। अधिकतर सरकारी नलकूप खराब पड़े हैं और नहरों में पानी नहीं है। कृषि वैज्ञानिकों का कहना है कि अगर कुछ दिन यही हालात रहे तो करीब चालीस फीसदी धान की पैदावार घट सकती है।
क्षेत्र धान का आच्छादन लक्ष्य(हैक्टेअर में) रोपाई
बिलासपुर 23304 2103
चमरौवा 17304 -
सैदनगर 16604 -
स्वार 31241 125
मिलक 28474 150
शाहबाद 23668 -
सिंचाई के साधन
सरकारी नलकूप चालू खराब
313 198 115
नहरें पानी सूखी पड़ी
93 - 93


किसानों को दलहनी फसलें अपनाने की सलाह
उत्तराखंड के जलाशयों में पानी का टोटा है। खराब नलकूपों को दुरस्त कराने के लिए सिंचाई और बिजली विभाग को लिखा गया है। सूखे की स्थिति में किसानों के दलहनी फसलें अपनाने की सलाह दी जा रही है। किसानों को अनुदान पर दलहनी बीज मुहैया कराया जाएगा। किसानों को सलाह दी जा रही कि नर्सरी की शाम के वक्त हल्की सिंचाई करते रहें।
वीरेंद्र कुमार , उप कृषि निदेशक

घट जाएगी धान की पैदावार
हाईबिभनड और मोटे धान की रोपाई 25 जून से 10 जुलाई, बासमती 20 जुलाई तक का सही समय है। लेकिन, अभी तक किसानों ने रोपाई शुरू भी नहीं की है। किसानों ने धान की नर्सरी सही वक्त पर तैयार कर ली है। धान की बुवाई लेट होने पर नर्सरी ज्यादा दिनों की हो जाएगी। देर से रोपाई करने पर पौधे में कल्ले नहीं फूटेंगे। करीब चालीस फीसदी उत्पादकता घट सकती है। इसलिए किसान कम अवधि वाली धान की प्रजति की रोपाई करें।
डा.अमरजीत सिंह राठी
वैज्ञानिक, कृषि विज्ञान केंद्र धमोरा


चमरौवा और सैदनगर के किसान गहरे संकट में
रामपुर। चमरौवा और सैदनगर के किसान गहरे संकट में हैं। दोनों क्षेत्रों को डार्क जोन घोषित कर दिया गया है। इसलिए बोरिंग पर पाबंदी लगा दी है। इसलिए किसान फसलों की सिंचाई को लेकर चिंतित हैं। चूंकि सरकारी नलकूप और नहरें किसानों का साथ नहीं दे रही हैं। सिंचाई के लिए पंपिंग सेट ही एक मात्र साधन है।

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें  
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Related Videos

Mission health : एथलेटिक बॉडी वाले करें ये वर्कआउट, बॉडी को मिलेगी शेप

Mission health : एथलेटिक बॉडी वाले करें ये वर्कआउट, बॉडी को मिलेगी शेप

22 सितंबर 2018

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree