घर घर पहुंची बिलासपुर की चारपाई

Rampur Updated Thu, 14 Jun 2012 12:00 PM IST
बिलासपुर। रामपुर के चाकू के बाद बिलासपुर की लोहे की चारपाई भी पहचान बनाने लगी है। इलाके में यह उद्योग तेजी से फैला है। इससे हजारों लोगों को रोजगार मिला है। कारोबारियों का आंकलन है कि नगर से हर माह साढ़े तीन करोड़ की चारपाई देशभर में जाती हैं।
नगर में सबसे पहले लोहे की चारपाई का व्यवसाय करीब 12 वर्ष पूर्व माठखेड़ा रोड पर कुलविंद्र सिंह व रामपुर रोड पर शहर इमाम मौलाना नासिर खां के छोटे भाई मौलाना आकिल खां ने श्ुारू किया था। करीब 12 सौ रुपये में बुनी हुई चारपाई जब ग्राहकों को मिलने लगी तो लोगों ने हाथोहाथ लिया। नगर में तमाम स्थानों माठखेड़ा रोड पर मुन्नू, अफजाल, रामपुर रोड पर आकिल खां, हमीद खां, शादाब शाह, नसीर खां, शानू खां, केमरी रोड पर नन्हे आदि चारपाई बनाने का व्यवसाय कर रहे हैं। इस व्यवसाय से जुड़े नगरिया कलां निवासी नन्हे ने बताया कि चारपाई के पाईप काटने से लेकर बुनाई करने तक तमाम कारीगर लगते हैं। इस व्यवसाय से औरतें भी जुड़ी हैं जो घरों में चारपाई बुनकर रोजाना तीन सौ रुपये तक की मजदूरी कर लेती हैं। करीब लोहे फ्रेम में बनी चारपाई वह थोक में बजन के अनुसार छह सौ रुपये से लेकर 12 सौ रुपये तक बिकती हैं। चारपाई रामपुर जिले के अलावा मुरादाबाद, बरेली, जेपीनगर, सीमांत उत्तराखंड में काफी समय से जाती हैं। हर माह औसतन 30-40 हजार चारपाई नगर से बाहर जाती हैं। करीब साढ़े तीन करोड़ से अधिक का व्यवसाय हर माह हो रहा है। चारपाई व्यवसायियों का कहना है कि वह शीघ्र ही ब्रांड का रजिस्ट्रेशन कराकर मार्का का माल बेचेंगे।

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