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24 दिन में मिट्टी में दफन हो गईं 11 जिंदगी

Rampur Updated Mon, 11 Jun 2012 12:00 PM IST
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रामपुर। जिंदगी की कीमत क्या वाकई सस्ती होती जा रही है। 24 दिन में 11 जिंदगियां मिट्टी में यूं ही दफन हो गईं। इन सबके बाद भी न तो ग्रामीण सबक ले रहे हैं और न ही प्रशासनिक अमला।
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ग्रामीण बेहद मजबूरी में अपने आशियानों की मरम्मत करने के लिए मिट्टी चुनते हैं। इनमें बच्चों से लेकर महिलाएं तक शामिल होती हैं। ग्रामीण इलाकों में मिट्टी खोदे जाने का सिलसिला कोई नया नहीं है। लेकिन, हादसे पर हादसे होने के बाद भी ग्रामीण बिना जिंदगी की परवाह किए बगैर गड्ढे और तालाबों की खुदाई करने में लग जाते हैं। मिलक चिकना गांव में 16 मई की सुबह कुछ ऐसा ही हुआ। यहां पर एक दो नहीं बल्कि पांच जिंदगी मिटट्ी में यूं ही दफन हो गईं। हादसे के बाद सरकारी राहत देकर सरकारी अमले न पल्ला झाड़ लिया। इसी दिन पनवड़िया के पास नाले की मिट्टी गिरी और इसमें दो मजदूर दबकर मौत के मुंह में समा गए। 24 दिन में 11 जिंदगियां दफन हो गईं,लेकिन सबक लेने को कोई तैयार नहीं है। सरकारी अमले की ओर से ग्रामीणों को इस मुद्दे पर जागरूक करने के लिए कोई कदम नहीं उठाया गया। जरूरत ग्रामीणों को भी जागरूक करने की है।

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