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शौचालयों से भी उठा घोटाले का पर्दा

Rampur Updated Wed, 23 May 2012 12:00 PM IST
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रामपुर/टांडा/शाहबाद। एनआरएचएम घोटाले के बाद अब शौचालयों पर से भी घोटाले का पर्दा उठने लगा है। डूडा के परियोजना निदेशक नगर पालिका दफ्तरों में कागजी रिकार्ड को खंगालने में जुटे हैं तो अफसरों की टीम स्थलीय निरीक्षण में लगी है। टीम को कहीं शौचालय अधूरे मिले तो कहीं जमीं पर निशान भी नहीं मिले। स्थलीय जांच बड़े पैमाने पर अनियमितता की संभावना है।
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लो कास्ट सेनीटेशन स्कीम के तहत गरीबों के घरों में शौचालय बनवाए गए थे। इसमें लाभार्थी को एक हजार और बाकी सरकार को देना था। टांडा में 1049 शौचालय बनाए गए। दो कार्यदायी संस्थाओं को जिम्मेदारी थी। आरोप है कि वार्डों में शौचालय बने ही नहीं, जबकि कई अधूरे हैं। मसलन वार्ड एक में मशकूर मियां पुत्र रिजवान मियां से एक हजार रुपये ले लिए लेकिन शौचालय तक नहीं बना। इसी वार्ड में मरघटी रोड पर शौचालय बनते ही धराशाई हो गये। वार्ड 8 और 12 में कोई हिंदू परिवार निवास नहीं करता, सूची में 10 तथा 17 परिवारों के नाम से शौचालय बने हैं। सभासद पति मुहम्मद वकील, समाजसेवी हाजी बाबू सहित कई सभासदों ने शिकायत की थी। लखनऊ से आये सूडा के परियोजना निदेशक आईपी कनौजिया ने अधिकारी सोशल डेवलेपमेंट के स्पेशलिस्ट मुहम्मद तैयब और मुहम्मद कासिम ने नगर पालिका में कागजात खंगाले। एसडीएम रमेश शुक्ला, तहसीलदार प्रभूदयाल के साथ स्थलीय निरीक्षण को तीन टीमों का गठन कर जांच कराई गई। दूसरी तरफ शाहबाद में जिम्मेदारी तीन एनजीओ को दी गई थी। जांच अधिकारी मुहल्ला बेलदरान, कस्सावान, बेदान, नालापार, अफगानान, हकीममान, अमीर अली खां, नई बस्ती, और कानूनगोयान में घूमें। उन्होंने घर-घर जाकर शौचालयोंकी जांच की। शाहबाद नगर क्षेत्र में 1900 के ज्यादा शौचालय बनवाए गए हैं। इनमें से अधिकतर शौचालय अधूरे मिले। लाभार्थियों की सूची से मिलान करने पर कई शौचालय मौके पर नहीं मिले।

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