विवाहिता की हत्या में पति को सात साल की कैद

Rampur Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
रामपुर। साल भर पहले दहेज की खातिर विवाहिता को मौत के घाट उतार देने के मामले में अदालत ने पति को सात साल की कैद सजा सुनाई है। अदालत ने साक्ष्य के अभाव में चार लोगों को बरी कर दिया है।
मामला भोट थाना क्षेत्र के बैरमनगर गांव का है। गांव के अमजद का नौ जून 04 को दिल्ली के जहांगीरपुर निवासी शमीम की बेटी शबाना उर्फ शब्बो से निकाह हुआ था। निकाह के बाद दोनों के दो बच्चे भी हुए। आरोप है कि दहेज के लिए ससुराली आए दिन प्रताड़ित करते थे। दहेज में मारुति कार न देने पर 25 जनवरी 2011 को शबाना को जलाकर मार डाला गया। इस मामले में मृतका के पिता की ओर से ससुर समेत पांच लोगों के खिलाफ मुकदमा कायम किया गया था। पुलिस ने मामले की तफ्तीश करते हुए सभी को गिरफ्तार कर लिया था साथ ही मामले की चार्जशीट भी कोर्ट में दाखिल की थी। कोर्ट ने मामले की सुनवाई करते हुए बुधवार को फैसला सुनाया। सुनवाई के दौरान सभी गवाह मुकर गए। अभियोजन पक्ष की ओर से पेश किए गए 11 में से आठ गवाह मुकर गए। अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता इरफान खां और दलविंदर सिंह ने दलील दी कि ससुरालियों ने दहेज के खातिर जलाकर मारा है और ससुराली यह साबित करने में असफल रहे हैं कि वह कैसे मरी है। यह साबित करने का भार बचाव पक्ष का है,जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि वह परिवार समेत शादी में गए हुए थे और बदमाशों ने विवाहिता की हत्या कर दी। लिहाजा उन्हें बरी किया जाए। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद एडीजे तृतीय पीके गुप्ता ने पति अमजद को दोषी मानते हुए सात साल की कैद और 17 हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। जबकि कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में ससुर अशरफ, देवर इशरत और मुशरत और देवरानी नाजरीन को बरी कर दिया।

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