बांके बिहारी जू मंदिर से निकलता था अंग्रेजों के खिलाफ अखबार

Hamirpur Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
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गहरौली (हमीरपुर)। आजादी के लिए अग्रणी भूमिका निभाने वाले गांव के एक दर्जन स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गांव के बांके बिहारी जू मंदिर में बैठकर अंग्रेजी हुकूमत के खिलाप रणनीति बनाते थे। साथ यहीं से बुंदेलखंड केसरी नाम का अखबार प्रकाशित होता था। ये अखबार भोर होने से पहले ही लोगों के पास पहुंच जाता था और लोगों को जागरूक करता था। आजादी में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले इस मंदिर की मौजूदा समय में उपेक्षा की जा रही है।
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डेढ़ सौ वर्ष पुराने बांके बिहारी जू मंदिर में गांव एवं आसपास के स्वतंत्रता संग्राम सेनानी रात में एकत्र होकर ब्रिटिश हुकूमत के खिलाफ रणनीति बनाते थे। इसी मंदिर में स्वर्गीय सेनानी मन्नीलाल गुरुदेव की देखरेख में रामगोपाल गुप्ता मौदहा बुंदेलखंड केसरी अखबार टाइप राइटर पर टाइप करके निकालते थे। इस अखबार को बांटने की जिम्मेदारी प्रमुख रूप से बैजनाथ पांडेय, नत्थू वर्मा, जगरूप सिंह टेढ़ा मंदिर के गुप्त रास्ते के जरिए की जाती थी। 1936 में श्रीगुरुदेव ने कांग्रेस का पहला जनपदीय अधिवेशन भी कराया था। जिसमें जवाहर लाल नेहरू भी मौजूद थे। मौजूदा समय में इस मंदिर की दशा बेहद जर्जर है। शासन प्रशासन की ओर से इसके जीर्णोद्धार का प्रयास नहीं हो रहा है। ऐतिहासिक धरोहर को पर्यटन विभाग में शामिल करके सेनानियों को सच्ची श्रद्धांजलि दी जा सकती है। गांव के बुजुर्ग श्रीप्रकाश पांडेय, विनोदचंद्र सक्सेना आदि का कहना है कि पहले के लोग देश के लिए जान तक न्यौछावर कर देते थे। मगर आज निजी स्वार्थ के चलते हत्या जैसा जघन्य अपराध करते हैं। पूर्व प्रधान विमलचंद्र गुरुदेव व छेदीलाल शिवहरे का कहना है कि तब के लोग देश को आजाद कराने के लिए अपना धन देते थे। अब आजाद देश के नेता व अधिकारी जनता के धन से अपने घरों की तिजोरियां व विदेशी बैंक भर रहे है।
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