1728 में फर्रुखाबाद के नवाब के अधीन था हमीरपुर

Hamirpur Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
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हमीरपुर जिले का क्षेत्र 1728 में फर्रुखाबाद के नवाब मोहम्मद खां बंगश के अधीन था। 1729 में मराठों ने शक्ति बढ़ाते हुए इस भूभाग को नवाब से छीन लिया और यह क्षेत्र पेशवा बाजीराव के अधीन हो गया। मराठों का राज्य हमीरपुर नगर तक फैल गया और यमुना नदी उनके राज्य की अंतिम सीमा थी। मराठा शासकाें ने 1815 में हमीरपुर नगर में तीन विशाल भवनों का निर्माण करवाया। जिसमें मौजूदा जिलाधिकारी न्यायालय व कलेक्ट्रेेट कार्यालय, दूसरे में उपजिलाधिकारी एवं तहसीलदार का न्यायालय व कार्यालय है तथा तीसरे में जिला जजी न्यायालय बना। 1823 में मराठा शासकों ने एक विशाल एवं भव्य आवासों का निर्माण कराया। जिसमें मौजूदा समय में डीएम व एसपी का निवास है। जिले में 13 जून 1857 में अंग्रेज शासकाें के विरुद्ध बिगुल बज गया। अंग्रेज शासकों के कोषागार में नियुक्त सुरक्षागार्ड तक ने विद्रोह कर दिया और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के साथ मिलकर अंग्रेज कलेक्टर टीके लाइक व ज्वाइंट मजिस्ट्रेट डोनार्ड ग्रांट के निवास पर धावा बोल दिया। जिस पर दोनों अपनी जान बचाने के लिए यमुना नदी किनारे सरसों के खेतों व कगाराें में कई दिन छिपे रहे। लेकिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों ने तलाश कर इनको पकड़ लिया। इसके बाद कचहरी परिसर में लाकर उन्हें गोली मार दी थी। 1857 की क्रांति के समय 3 जून 1857 से 24 मई 1858 तक यह क्षेत्र स्वतंत्र रहा। 24 मई 1958 को अंग्रेजी फौज ने पुन: इस भूभाग पर कब्जा कर लिया। इस कोठी को राज्य संपत्ति घोषित कर दी। अंग्रेज जनरल ने पेशवा नारायण राव को गिरफ्तार करके हजारी बाग भेज दिया। जहां 1860 में उनकी मृत्यु हो गई। उनके 9 वर्षीय छोटे भाई माधव राव को गिरफ्तार करके बरेली जेल भेजा गया। 1 जुलाई 1857 में अंग्रेजी फौज ने जनपद के अन्य क्षेत्रों को पेशवाओं से छीनकर अपने अधीन कर लिया। मौदहा तहसील जो नवाब बांदा के अधीन थी। वह अंग्रेजाें के अधीन हो गई। अंग्रेजाें ने देशी रियासताें बेरी, बावनी, चरखारी, सरीला के जमींदाराें की सहायता से पुन: अधिपत्य जमा लिया लेकिन स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का संग्राम जारी रहा। 21 फरवरी 1915 के लाहौर बमकांड में जनपद के राठ तहसील के ग्राम सिकरोधा के महान क्रांतिकारी पंडित परमानंद को 13 सितंबर 1915 को फांसी की सजा सुनाई गई। जो कालांतर में बदलकर अजन्म काला पानी की सजा में परिवर्तित कर दी गई।
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