प्रतिबंध के बाद भी मछलियों का शिकार

Hamirpur Updated Sun, 15 Jul 2012 12:00 PM IST
हमीरपुर। प्रजजन काल के दौरान मत्स्य आखेट करना प्रतिबध़ित है। इसके बावजूद कुछ ठेकेदार मनमानी तरीके से नदियों में जाल डाल मछलियों का शिकार करने में जुटे है। वहीं मत्स्य विभाग को यही नही पता कि नदियों में मछलियों का शिकार कौन कर रहा है।
गौरतलब हो कि एक जुलाई से 15 अगस्त तक मछलियों का प्रजजन काल शुरू हो जाता है। मछलियों की जन्मदर बढ़ाने के लिए इनके शिकार पर पूर्णतया प्रतिबंध होता है। लेकिन कुछ लोग प्रतिबंध के बावजूद नदियों में जाल डालकर मनमाने तरीके से मछलियों का शिकार कर रहे है। इन मछलियों को पकड़कर शिकारी ऊंचे दामों में बेच रहे है। इसके पीछे प्रतिबंध के दौरान मछलियों की कमी होते ही मांग बढ़ जाती है और इन ठेकेदारों को अधिक मुनाफा मिलने लगता है। मुख्यालय में बेतवा व यमुना से हो रहे आखेट के बाद कानपुर जैसे शहरों में बड़ी तादाद मछलियां भेजी जा रही है। साथ ही रमेड़ी तरौस व पुल के निकट मछलियों की दुकानों पर बेधड़क बेचने का काम जारी है। इस मामले में सहायक निदेशक मत्स्य रामस्वरूप का कहना है कि उन्हें खुद ही पता नहीं है कि इन नदियों के कितने ठेकेदार काम कर रहे है। नदियों के मत्स्य आखेट के पट्टे जिला परिषद से दिए जाते है।

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