ब्रह्मज्ञान के बगैर जीवन यापन पशु के सामान

Hamirpur Updated Mon, 02 Jul 2012 12:00 PM IST
हमीरपुर। चौरासी लाख योनियों में मानव को ही सर्वश्रेष्ठ योनी में गिना गया है। ज्ञान प्राप्त करने के बावजूद ब्रहृम ज्ञान के बगैर जीवन यापन करता तो पशु समान माना जाता है।
यह बात रमेड़ी स्थित संत निरकंारी सत्संग भवन में हुए सत्संग में महात्मा सुशील कुमार ने कही। उन्होंने कहा कि जिसको भी ब्रहृम ज्ञान की दिशा मिल गई है और उसने अपने आप को सद्गुरु के चरणों में समर्पित कर दिया है तो वह आत्म कल्याण के साथ-साथ औरों का भी कल्याण कर पाता है। उन्होंने कहा कि ब्रहृम ज्ञान को लेकर घर में ही नही बैठना चाहिए उसे हमेशा ताजा रखना चाहिए। ताजा रखने के लिए सत्संग जरूरी है। क्योंकि सत्संग करने से ज्ञानमार्ग में चलने का अभ्यास होता है और परम पिता परमात्मा से जुड़े रहने का एहसास होता रहता है। मानव जाति को संदेश देते हुए कहा कि भौतिकता की ओर इंसान को ज्यादा नही भागना चाहिए। क्योंकि भौतिकता और इच्छाओं का कोई अंत नहीं है। इसमें लिप्त होने से इंसान को दुखो का बोझ ढोना पड़ता है। भौतिकता में लिप्त होने से सुखशांति तो क्षणिक मात्र होती है। बदले में मनुष्य दया, प्रेम, करुणा और इंसानियत खो बैठता है और अंत में उसे न माया साथ देती है, न तो दुनिया के लोग। इस अवसर पर दिनेश कुमार, गयादीन, सरिता गुप्ता, राधागुप्ता, पिंकी, विजयलक्ष्मी, रामधार वर्मा, होरीलाल, अरविंद कुुमार तिवारी, देशराज रचनाकर, गोविंद राम द्विवेदी, उर्मिला देवी आदि महात्माओं ने भी अपने गीत व विचार रखे। संचालन जगदीश शंकर निरंकारी ने किया।

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