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दूध आवक घटने से प्लांट पर खर्च का बोझ

Hamirpur Updated Sun, 10 Jun 2012 12:00 PM IST
हमीरपुर। भीषण गर्मी का खामियाजा सुमेरपुर स्थित चिलिंग प्लांट को भुगतना पड़ रहा है। दूध का उत्पादन घटने से इसकी आवक काफी कम हो गई है, जिससे प्लांट के खर्च का बोझ बढ़ता जा रहा है। लक्ष्य का एक चौथाई भी दूध प्लांट में नहीं आ रहा है। दूध का काम कर रही समितियों मेें दूध की आवक कम है। गर्मी होने से मवेशियों को हरा चारा नहीं मिल रहा है।
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जिले में दूध उत्पादन बढ़ाने के लिए सरकार ने 1975 में सुमेरपुर कसबे में चिलिंग प्लांट खोला था। प्लांट का लक्ष्य 5 हजार लीटर दूध रोज तैयार करना था। लेकिन लक्ष्य कभी भी हासिल नहीं हुआ। कई बार ऐसे हालात बने कि प्लांट में ताला पड़ने की नौबत आ गई। लेकिन बुंदेलखंड विकास पैकेज से धनराशि मिलने पर चिलिंग प्लांट की हालत को जीवनदान मिल गया। इसके अलावा पशुपालकों को भी बुंदेलखंड पैकेज से अनुदान आदि मिला। जिससे दूध का उत्पादन बढ़ा। बीते वर्ष प्लांट ने अपने लक्ष्य को पार करते हुए 55 सौ लीटर दूध रोज आने लगा था। दुग्ध डेयरी में आज की तिथि में 1450 लीटर दूध प्रतिदिन आ रहा है। दूध की आवक कम होने के पीछे भैंसों के दूध कम देने और शादियों में दूध की खपत बढ़ना बताया जा रहा है।
225 में 90 समितियां हैं एक्टिव
भरुआसुमेरपुर। दुग्ध डेयरी के तहत गठित 225 समितियों में सिर्फ 90 समितियां ही काम कर रही है। दूध लाने के लिए लगे वाहनों की दूरियां कम कर दी गई है। इतना कम दूध आ रहा है कि वाहनाें का खर्च भी नहीं निकल रहा है। गौरतलब हो कि सरीला ममना रोड पर जाने वाला वाहन जहां 15 सौ लीटर दूध लाता रहा है। उसी वाहन पर अब करीब 260 लीटर दूध आता है। इसी तरह खन्ना रूट पर जाने वाला वाहन 1 हजार लीटर के सापेक्ष 180 लीटर दूध ला रहा है। कुरारा रूट से पांच सौ लीटर दूध आ रहा है। जबकि जसपुरा क्षेत्र के वाहन को हटा दिया गया है और दूध लाने वाली समितियों को भी भाड़ा जोड़कर उन्हें पैसा दिया जा रहा है। उप दुग्ध अधिकारी राजेश कुमार ने बताया कि गर्मी के चलते पशु दूध कम दे रहे है।

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