जीवन रूपी खेती में सेवा, कर्म के बीज बोना जरूरी

Hamirpur Updated Thu, 07 Jun 2012 12:00 PM IST
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मुस्करा। धर्म और भक्ति के क्षेत्र में केवल प्रभु का गुणगान करना पर्याप्त नहीं है बल्कि जीवन रूपी खेती में सेवा और कर्म के बीज बोना जरूरी है। इस प्रकार एक किसान अपनी खेती की दिन रात रखवाली करता है और न ही उस खेती की गुणगान करता है। बल्कि उसे अपने शारीरिक बल से उपजाऊ करके बीज भी बोता है। तब ही उसे मनचाही फसल काटने को मिलती है।
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यह बातें कसबा स्थित छहथोक मोहाल पुरवा में आयोजित पंच कुंडीय शतचंडी महायज्ञ में कथावाचक संपत कुमार शास्त्री नैनी सारन जनपद हरदोई ने कही। उन्होंने कहा कि धार्मिक कार्यक्रमों का आयोजन करना तो पुण्य का कार्य है ही। किंतु उससे भी ज्यादा अहम भूमिका धार्मिक कार्यक्रमों में सेवादाराें की होती है। जो परम पिता परमात्मा के प्रति पूर्ण रूप से समर्पित होते है। उन्होंने भक्ति का गुणधर्म बताते हुए कहा कि सेवा करते जाए, फिर भी मन में प्रभु से डरते जाए और क्षमा मांगते जाए। यहीं सुख और कल्याण का रास्ता है।
यज्ञ में श्रद्धालुओं की आस्था उमड़ी
मुस्करा। तापमान गिरने के चलते यज्ञ में भक्तों की आस्था उमड़ी हुजूम उमड़ता रहा। सुबह 5 बजे से महिला पुरुष, वृद्ध, जवान यज्ञशाला की ओर पैदल ही जा रहे हैं। परिक्रमा में भारी भीड़ होने से यज्ञ कमेटी ने पुरुषों व महिलाओं की अलग-अलग व्यवस्था की है। परिक्रमा के चारो तरफ टैंकरों से पानी का छिड़काव किया जा रहा है। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल की व्यवस्था की गई है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के प्रभारी चिकित्साधिकारी द्वारा यज्ञ स्थल में स्वास्थ्य कर्मियों का एक शिविर लगाया गया है। शतचंडी महायज्ञ का यह छठवां दिन है। आगामी 9 जून को भंडारा एवं भोज होगा। शतचंडी महायज्ञ के मुख्य व्यवस्थापक अमृतलाल दाऊ, जयकरन राजपूत, शिवकरन द्विवेदी, हरी प्रमोद राजपूत, नारायण सिंह राजपूत, रामशरण शुक्ला, शंकर सिंह पट्टीदार विशेष सहयोग कर रहे है।
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