जल, जंगल, जमीन बचाएं स्वस्थ्य जीवन अपनाएं

Hamirpur Updated Tue, 05 Jun 2012 12:00 PM IST
भरुआसुमेरपुर (हमीरपुर)। जहां एक ओर वन माफिया निजी हितों के लिए वृक्षों की कटाई करने में लगे हैं वहीं कुछ समझदार किसान इस प्रथ्वी को बचाने के लिए फलदार और इमारती लकड़ी के वृक्ष लगा रहे हैं। फलदार वृक्षों को लगाकर वह पर्यावरण सुधारने के साथ रोजी-रोटी भी चला रहे हैं। इस विकासखंड क्षेत्र के चंदौखी गांव के एक प्रगतिशील किसान के हाइवे किनारे के खेतों पर करीब 500 अमरूद के वृक्ष लहलहा रहे हैं।
दुनिया को बचाने के लिए मनुष्य को जल, जंगल और जमीन बचानी होगी। मौजूदा समय में लोग स्वार्थवश लाभ के लिए पर्यावरण को नष्ट करने में लगे हैं। फैक्ट्रियां धुआं उगल रही है जबकि वन माफिया जंगलों का सफाया कर रहे हैं। इसके बावजूद कुछ समझदार और प्रगतिशील किसान पर्यावरण को संरक्षित करने के प्रयास में जुटे हैं। चंदौखी गांव के किसान कामता प्रसाद द्विवेदी ने हाइवे किनारे अपने खेतों पर करीब 500 अमरूद के पेड़ों का हराभरा बगीचा तैयार कर रहे है। इस बगीचे की चौकीदारी कर रहे प्रभु ने बताया कि वह छोटे छोटे वृक्षों को तैयार करने में लगा है। इसी तरह चंदपुरवा गांव में पूर्व प्रधान रामबिहारी कुशवाहा के कार्यकाल में मनरेगा के तहत कई एकड़ में बगीचा लगाया गया, जो आज पर्यावरण बचाने के साथ ही फल भी दे रहा है। किसान अयोध्या सिंह, संतोष सिंह, रामसनेही साहू, कामता प्रसाद अहिरवार, धर्मेंद्र सिंह सहित तमाम ऐसे पर्यावरण प्रेमी है जिन्होंने वृक्षों को सींच पाल कर बड़ा कर रहे हैं।

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