संत न होते जगत में तो जल मरता संसार

Hamirpur Updated Mon, 04 Jun 2012 12:00 PM IST
हमीरपुर। आग लगी आकाश में झर झर झरे अंगार, संत न होते जगत में तो जल मरता संसार। अर्थात आज संसार की यही हालत है कि लोगों की जुबान से आग बरस रही है, मीठी वाणी, प्यार की भाषा का अभाव हो गया है। जिसको देखो वहीं अपने स्वार्थ के कारण कटु वचनों का प्रयोग किए जा रहा है।
यह बात रविवार को संत निरंकारी सत्संग भवन में आयोजित सत्संग कार्यक्रम में बहन वंदना निरंकारी ने कही। उन्होंने कहा कि लोगों के जीवन से प्रीति, प्यार, नम्रता व सहनशीलता जैसे विशेष गुण निकल गए है। उनकी जगह घृणा, द्वेष, बैर, बुराई, अमीर, गरीब व ऊंच-नीच के भाव भर गए है। जिसके कारण न तो वह स्वयं चैन से जी रहा है और न ही दूसरों को जीने दे रहा है। आदमी आदमी को ही नही देखना पसंद करता है। एक संत ही ऐसे है जो प्यार, नम्रता व सहनशीलता जैसे विशेष गुणों के कारण समाज में शांति कायम किए है तथा दूसरों को भी भक्ति भाव से जोड़कर उनके अंदर भी मानवीय गुण भरते रहते है। इस मौके पर महात्मा गयादीन, शशि, राधा गुप्ता, रामदुलारी, शोभा, राजबहादुर, शिवकुमार सेट्टी, श्रुतिकीर्ति सचान, अनूपा, रामलाल, रामकृष्ण सहित सैकड़ो श्रद्धालु मौजूद रहे। इस मौके पर निरंकारी प्रमुख क्रांतिकुमार निरंकारी, चरन सिंह व माता रानीदेवी ने प्रवचन किए।

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