लोकविधा के संवर्धन व संरक्षण की जरूरत

Hamirpur Updated Fri, 18 May 2012 12:00 PM IST
हमीरपुर। बुंदेलखंड में लोक विधा के कलाकारों की कमी नहीं है, बस जरूरत है संवर्धन व संरक्षण की। इसी को देखते हुए जिलाधिकारी बी चंद्रकला के प्रयास सफल होते दिख रहे है। गुरुवार को केंद्र सरकार से संचालित उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र के निदेशक आनन्द वर्धन शुक्ला ने मुख्यालय में सितंबर में देशभर के 150 कलाकारों के जरिए दो दिन लोकविधा (माटी के रंग) नाम से लोगों को रूबरू कराने की हामी भरी।
सांस्कृतिक केंद्र इलाहाबाद के निदेशक गुरुवार को मुख्यालय आए और कहा कि उनका केंद्र सात प्रांतों में काम कर रहा है। वह बड़े बड़े महानगरों में इस विधा को जीवंत करने का प्रयास कर रहे हैं लेकिन महानगरों में लोग बहुत कम संख्या में आते है। लोक कलाएं धीरे धीरे सिकुड़ती जा रही है। इसके चलते अब वह इस प्रयास में है कि छोटे जनपदों जहां इस तरह के कार्यक्रम नहीं होते है वहां इस विधा को जीवंत करने का प्रयास कर रहे हैं। उन्होंने ने कहा कि जिलाधिकारी इलाहाबाद में रही है। उनके आग्रह पर वह आए हैं। सितंबर में चित्रकूट, हमीरपुर, मैनपुरी, सहारनपुर व पीलीभीत में कार्यक्रम कराएंगे। वह रजत जयंती मना रहे है। यह भी बताया कि प्रदेश के कई स्थानों पर 31 मई 2013 तक कार्यक्रम होंगे। उन्होंने बताया कि दूसरे प्रांतों से डेढ़ सौ कलाकार आएंगे। डायरेक्टर ने बताया कि कलाकारों को प्रोत्साहन राशि में वृद्धि के प्रयास किए गए है। अभी उन्हें मात्र 400 रुपए पारिश्रमिक मिलता है जिसे बढ़ाकर 1 हजार किया जाना है। इस मौके पर जिलाधिकारी के प्रयास से एक दिन होने वाले कार्यक्रम को दो दिन किए जाने की हामी डायरेक्टर ने भर ली। आगामी सितंबर में चित्रकूट के बाद हमीरपुर शहर में लोक सांस्कृतिक कार्यक्रम होगा। इसमें स्थानीय लोक कलाकारों के भी कार्यक्रम कराए जाएंगे।

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