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जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ पारित हुआ अविश्वास प्रस्ताव

Hamirpur Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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हमीरपुर। गुरुवार को जिला पंचायत अध्यक्ष संजय दीक्षित के खिलाफ लाया अविश्वास प्रस्ताव पारित हो गया। पीठासीन अधिकारी/अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश अचल सचदेव की मौजूदगी में अविश्वास प्रस्ताव पर 11 जिला पंचायत सदस्यों ने मतदान किया। जिला पंचायत में कुछ 16 सदस्य हैं, जिनमें से पांच सदस्य अनुपस्थित रहे। अध्यक्ष के पक्ष में एक भी सदस्य नहीं आया।
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बसपा शासनकाल के दौरान हुए जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव में संजय दीक्षित को बसपा ने अपना प्रत्याशी बनाया। तब उनके विरोध में किसी और के नामांकन न करने से वह निर्विरोध चुने गए। लेकिन प्रदेश में जैसे ही सत्ता बदली तो विरोधियों के स्वर मुखर होने लगे। इसी को लेकर बीती 14 अप्रैल को जिला पंचायत के 10 सदस्यों ने जिलाधिकारी को शपथ पत्र देकर अध्यक्ष के प्रति अविश्वास जताया था। इसके बाद जरिया क्षेत्र की सदस्य मनोरमा बरुआ भी इन्हीं सदस्यों के खेमे में शामिल हुई और उसने भी 19 अप्रैल को जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ शपथ पत्र देकर अविश्वास जताया। इस पर जिलाधिकारी बी चंद्रकला ने अविश्वास प्रस्ताव की तारीख 10 मई निर्धारित की।
इसको लेकर गुरुवार को पूरे तामझाम के साथ अविश्वास प्रस्ताव लाने वाले सभी 11 सदस्य रानी यादव, विलेश यादव, अनसुइया, अशोक कुमार, विष्णुशंकर शिवहरे, गौरी मिश्रा, यशेंद्र राजपूत, देवीदान अनुरागी, हरदीपक, कमलेश कुमार, मनोरमा बरुआ निर्धारित समय पर जिला पंचायत के सभागार में उपस्थित हुए। जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष संजय दीक्षित, पुष्पलता, रामसहायं, किरन, नीलम कुमारी नहीं आए। पीठासीन अधिकारी ने प्रस्ताव पढ़कर सुनाया। इसके बाद वाद विवाद के लिए दो घंटे का समय नियत किया। इस मौके पर विष्णुशंकर शिवहरे व यशेंद्र राजपूत ने अपने अपने विचार व्यक्त किए। इसके बाद दोपहर 12.25 पर मतदान कराया गया। इस मतदान में मौजूद सभी 11 सदस्यों ने जिला पंचायत अध्यक्ष के खिलाफ विरोध में वोट डाले। पीठासीन अधिकारी/अपर जिला जज विशेष न्यायाधीश (आवश्यक वस्तु अधिनियम) अचल सचदेव ने अपना फैसला सुनाया। बताया कि उप्र क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत अधिनियम 1961 की धारा 28 की उपधारा 11 के अनुक्रम में कुल संख्या के आधे से अधिक संख्या से प्रस्ताव पारित हुआ। इसमें कहा कि अविश्वास प्रस्ताव पारित होने के बाद 11 मई से संजय जिला पंचायत अध्यक्ष के पद पर नहीं रहेंगे। अविश्वास प्रस्ताव की कार्रवाई पूर्ण होने के बाद एक प्रति प्रमुख सचिव पंचायती राज व एक प्रति जिलाधिकारी को सौंपी गई। अविश्वास प्रस्ताव के दौरान 53 पेज की कार्रवाई संपन्न हुई जिसे सील कर सुरक्षित कर दिया गया।

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