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184 गांवों में बाढ़ की आशंका

Hamirpur Updated Mon, 07 May 2012 12:00 PM IST
हमीरपुर। जिला प्रशासन एक तरफ बैठकें कर पेयजल समस्या से निजात पाने के लिए अधिकारियों को दिशा निर्देश दे रह है। वहीं बाढ़ प्रबंधन योजना की भी अभी से तैयारियां शुरू कर दी है। लेकिन जिले की किसी भी तहसील में एक भी गोताखोर न होने से बाढ़ आने पर प्रशासन की पेशानी पर बल पैदा कर रहा है। जिले में विभिन्न नदियों की बाढ़ से 184 गांव की करीब 321987 आबादी प्रभावित होती है।
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कलेक्ट्रेट के महारानी लक्ष्मीबाई सभागर में आयोजित बाढ़ प्रबंधन योजना की बैठक में अपर जिलाधिकारी एचजीएस पुंडीर ने बाढ़ नियंत्रण के लिए अभी से तैयारी के निर्देश दिए। तहसील के राजस्व अधिकारियों ने बताया गया कि तहसील में बेतवा नदी से 56 गांव, यमुना नदी से 20 व चंद्रावल नदी से पांच गांव प्रभावित होते हैं। इसी तरह मौदहा के राजस्व अधिकारियों ने बताया कि उनकी तहसील में बेतवा नदी से तीन, सीहो नाला से छह, चंद्रावल नदी से 18, केन नदी से छह, वर्मा नदी से नौ और श्याम नदी से सात गांव प्रभावित होते हैं। राठ तहसील में धसान नदी से 11, वर्मा नदी से नौ गांवों में बाढ़ की आशंका रहती है। सरीला तहसील के राजस्व अधिकारियों ने बताया कि बेतवा नदी से 24, धंसान नदी से एक, वर्मा नदी से नौ गांव प्रभावित होते है। इस प्रकार जिले की नदियों से कुल 184 गांवों में बाढ़ की आशंका बनी रहती है तथा इन गांवों की आबादी 321987 लोग प्रभावित होते है।
गौरतलब हो कि जिले में 1996 के बाद बाढ़ नहीं आई है। 1996 में यमुना नदी का जल स्तर खतरे के निशान से चार मीटर ऊपर और बेतवा नदी खतरे के निशान से छह मीटर बही थी थी। बाढ़ प्रबंधन की योजना में यह भी खुलासा हुआ कि किसी भी तहसील में गोताखोर नहीं है। अपर जिलाधिकारी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि 15 जून के बाद नोडल अधिकारी अधिशाषी अभियंता मौदहा बांध से संपर्क बनाए रखें। बाढ़ में प्रभावी नियंत्रण के लिए चौकियां स्थापित किए जाने के साथ नावों के मालिकों से संपर्क रखें। इस मौके पर सभी एसडीएम, तहसीलदार, नायब तहसीलदार सहित अन्य अधिकारी मौजूद रहे।

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