असलहा लाइसेंस के एक सौ आवेदन अस्वीकार

Bhadohi Updated Thu, 23 Aug 2012 12:00 PM IST
ज्ञानपुर। पिस्टल और रिवाल्वर के लिए आवेदन करने वालों को पुलिस विभाग से जोरदार झटका लगा है। विभाग ने एक सौ से अधिक आवेदनों को शस्त्रत्त् लाइसेंस की संस्तुति नहीं करते हुए इनकी फाइलों को अस्वीकार कर दिया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन्हें जान माल का कोई खतरा नहीं है। यह रुतबा बढ़ाने और शौक के लिए शस्त्र लाइसेंस लेना चाहते हैं।
कभी सुरक्षा के लिहाज लिया जाने वाला शस्त्रत्त् लाइसेंस वर्तमान समय में शौक और रुतबा का विषय बन गया है। तमाम लोग जहां अपने सुरक्षा के लिए लाइसेंस के लिए आवेदन कर रहे हैं वहीं बड़ी संख्या में ऐसे लोग भी हैं जो सिर्फ शौक के लिए शस्त्र लेना चाहते हैं। जिले भर से साढ़े तीन सौ से अधिक लोगों ने इस वर्ष शस्त्रत्त् के लिए आवेदन किया है। जिलाधिकारी कार्यालय तक फाइल पहुंचने से पहले उसकी विभिन्न स्तरों पर जांच पड़ताल कराई जाती है कि आवेदक का दावा सही है या नहीं। शस्त्रत्त् लाइसेंस के लिए आए आवेदन पत्रों की जांच एसओ, सीओ, एएसपी, स्थानीय अभिसूचना इकाई आदि के स्तरों से स्वीकृत होने के बाद फाइल एसपी कार्यालय से डीएम दफ्तर तक पहुंचती है। इसमें से 100 से अधिक शस्त्रत्त् लाइसेंस के लिए आवेदनों को पुलिस विभाग के विभिन्न कार्यालयों से अस्वीकार कर दिया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि इन लोगों ने शौक और रुतबा बढ़ाने के लिए शस्त्रत्त् के लिए आवेदन किया है। इन्हें किसी से जान-माल का कोई खतरा नहीं है। इनके आवेदन को अस्वीकार किया जाता है। पुलिस विभाग से संस्तुति नहीं मिलने से 100 से अधिक आवेदकों को जोरदार झटका लगा है। इन दिनों शस्त्रत्त् लाइसेंस के लिए आए आवेदन पत्रों के निस्तारण का कार्य काफी तेजी गति से किया जा रहा है। आवेदकों के दावे की गहराई से जांच कराई जा रही है। ज्ञात है कि शस्त्रत्त् लाइसेंस में राजनीति भी काफी हावी है। पहुंच और प्रभाव वालों की फाइलें ही मुकाम तक पहुंच पाती हैं। कमजोर पैरवी वालों की फाइल कलेक्ट्रेट पहुंचने के पहले ही रद्दी टोकरी में पहुंच जाती है। वैसे भी जिले में शस्त्रत्त् लाइसेंस की गति काफी धीमी गति से चल रही है। एक से डेढ़ वर्ष के भीतर बमुश्किल आधा दर्जन लोगों को ही शस्त्रत्त् का लाइसेंस जारी किया गया है। दो सौ से अधिक फाइलें लंबे समय से कार्यालयों में लंबित पड़ी हैं। सारी औपचारिकता पूरी हो जाने के बाद भी इनका निस्तारण नहीं हो पा रहा है।

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