अलविदा..अलविदा माहे सोम अलविदा

Bhadohi Updated Mon, 20 Aug 2012 12:00 PM IST
ज्ञानपुर। अलविदा..अलविदा माहे सोम अलविदा। माहे रमजान के रुखसत होने का दर्द किसी शायर ने कुछ यों बयां किया है। इसका बखूबी एहसास कराकर माहे सोम यानी मुकद्दस रमजान का महीना रविवार को चांद नजर आते ही रुखसत हो गया। माहे रमजान में रोजा रखकर इबादत करते हुए खुदा की रहमत, बरकत और अजमत हासिल करने वाले रोजेदारों के लिए किसी गम से कम नहीं है। सबसे अधिक माहे रमजान के रुखसत होने का गम बुजुर्ग, परहेजगार और खुदा की इबादत में लगे रहने वाले शख्शियतों को है। जो कि मुकद्दस माह के आगाज होते ही खुशी से निहाल हो उठे थे कि माहे रमजान में फर्ज इबादत का सवाब 70 गुना मिलेगा और रोजा रखकर इबादत करने का भी नायाब मौका मिलेगा। जिसका इस तरह के मौके पर उन्होंने पूरे माह इबादत करके बिताया। यहां तक कि इससे भी जी नहीं भरा तो आखिरी अशरे में एतकाफ में बैठकर इबादत की। इसके बाद ईद-उल-फितर चांद नजर आया तो उन्हें एतकाफ से बाहर आना पड़ा। ऐसे इबादतगार तो चाहते ही नहीं थे कि यह रहमतों, बरकतों और अजमतों का महीना रुखसत हो।
अंतिम दिन गर्मी और उमस ने किया बेहाल
ज्ञानपुर। रोजेदारों के लिए रविवार का अंतिम रोजा मुश्किलों से भरा साबित हुआ। ईद की तैयारियों में जुटे रोजेदारों के लिए रविवार को गर्मी और उमस के साथ कड़ी धूप ने परेशानी में डाल रखा था। लोग घरों के अंदर बैठकर पूरा दिन काटते रहे। बाहर निकलने वाले रोजेदारों की हलक सूखती रही। माहे रमजान का दो अशरा तो बारिश होने और बदली से रोजेदारों के लिए राहत भरा रहा, लेकिन इसके बाद एक-एक दिन की कड़ी धूप मुश्किलें बढ़ाती गईं। रविवार शाम को इफ्तार के बाद ही रोजेदारों को राहत मिल सकी। इसके बाद आसमान में नजर आए चांद ने ईद की खुशी लाकर चेहरों पर रौनक दी।

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