डीपीसी की बैठक टलने से प्राचार्य के दावेदारों को झटका

Bhadohi Updated Tue, 14 Aug 2012 12:00 PM IST
ज्ञानपुर। प्रदेश भर के राजकीय महाविद्यालयों में खाली पड़े प्राचार्य के पदों को भरने के लिए जुलाई तक होने वाली विभागीय प्रोन्नति कमेटी (डीपीसी) की बैठक स्थगित होने से प्राचार्य बनने का सपना देख रहे तमाम शिक्षकों को झटका लगा है। यह बैठक दिसंबर से पहले नहीं कराई गई तो कई दावेदार प्राचार्य पद का सुख लिए बिना ही रिटायर्ड हो जाएंगे। प्राचार्य पद की दौड़ में चल रहे शिक्षकों के लिए मुसीबत से कम नहीं है।
प्रदेशभर में लगभग डेढ़ सौ राजकीय महाविद्यालय हैं। करीब 60 महाविद्यालय प्रभारी प्राचार्य के भरोसे चल रहे हैं। जो कि पिछली बार हुई डीपीसी से बने प्राचार्यों के सेवानिवृत्त होने से रिक्त चल रहे हैं। फरवरी 2009 में हुई डीपीसी से प्रदेश के लगभग सौ शिक्षकों की प्रोन्नति प्राचार्य पद पर हुई थी। इनमें भदोही में केएनपीजी से आधा दर्जन शिक्षक प्राचार्य बने थे। लगभग इतने ही इस बार भी केएनपीजी के शिक्षक प्राचार्य बनने के तगड़े दावेदार हैं। अब डीपीसी से वरिष्ठता सूची जारी करने की प्रक्रिया में जितनी देर होगी, उसी तरह से शिक्षक प्राचार्य बनने से वंचित होते रहेंगे। उच्च शिक्षा विभाग की ओर से हर दो वर्ष पर डीपीसी की बैठक कराकर वरिष्ठता सूची जारी की जाती है, लेकिन इस बार डीपीसी की बैठक को हुए साढ़े तीन वर्ष बीत चुके हैं। इस संबंध में राजकीय महाविद्यालय शिक्षक संघ के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. जेपी मिश्रा का कहना है कि विधानसभा चुनाव के बाद से ही बैठक करा कर वरिष्ठता सूची जारी करने की प्रक्रिया चल रही थी। इस दौरान विभिन्न कारणों से डीपीसी टलती रही थी।

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