विज्ञापन

नरेश चंद्र ने वतन के लिए दी थी प्राणों की आहूति

Bhadohi Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
खमरिया। देश की आजादी की लड़ाई में शहीद नरेश चंद्र श्रीवास्तव के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। छात्र जीवन से ही भारत माता को परतंत्रता की बेड़ियों से मुक्त कराने के लिए उन्होंने अपने प्राणों की आहूति दे दी। भारत छोड़ो आंदोलन के तहत उन्होंने मिर्जापुर के पहाड़ा स्टेशन को आग के हवाले कर दिया। जिसमें वह अपने साथ ही बचाने के लिए आग में कूद पड़े और बुरी तरह से झुलस गए। काफी प्रयास के बाद भी पुलिस उन्हें जिंदा या मुर्दा नहीं पकड़ सकी।
विज्ञापन
विज्ञापन
शहीद नरेश चंद्र श्रीवास्तव का जन्म खमरिया नगर में पिता स्व. रामशंकर लाल श्रीवास्तव और माता स्व. किशन देई श्रीवास्तव के यहां आठ जुलाई 1924 को हुआ था। इनकी प्रारंभिक शिक्षा ननिहाल जौनपुर में हुई थी। इन्होंने बीएलजे इंटर कालेज मिर्जापुर में 10वीं कक्षा की पढ़ाई के दौरान ही देश की आजादी के लिए संघर्ष करना शुरू कर दिया। नौ अगस्त 1942 को पार्लियामेंट में उस समय के मिनिस्टर एमरी के भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सेनानियों के विरोध में भाषण देने पर आग बबूला हो गए। 14 अगस्त 1942 को महात्मा गांधी, पं. जवाहर लाल नेहरू के भाषण से प्रभावित होकर मिर्जापुर के गैपुरा में आयोजित क्रांतिकारियों की बैठक में हिस्सा लिया। 17 अगस्त 1942 को बैठक की योजना के अनुसार अपने साथियों जीत नारायण तिवारी निवासी पकरी मिर्जापुर, पुष्करनाथ निवासी बबुरा मिर्जापुर, छविनाथ बिरौरा मिर्जापुर के साथ मिर्जापुर-चुनार रेलवे स्टेशन के बीच पहाड़ा स्टेशन को फूंक दिया। संयोग से एक साथी छविनाथ स्टेशन के अंदर फंस गए और आग की लपटों से घिर गए। शहीद नरेश चंद्र ने अपने जान की परवाह न करके साथी को बचाने के लिए आग से घिरे स्टेशन के भीतर छलांग लगा दी। छविनाथ को तो बाहर फेंक दिया लेकिन शहीद नरेश बुरी तरह से जल गए। पुलिस के आने की जानकारी होने पर वह गंगा के किनारे गए और वहां एक नाव पर बैठकर वाराणसी की ओर जाने लगे। दूसरी नाव से पुलिस ने भी पीछा कर लिया। शहीद नरेश की हालत नाजुक थी और उन्होंने साथियों से कहा कि मुझे छोड़कर तुम लोग अपने को बचाओ। ऐसा कहकर यह सदा के लिए चिरनिद्रा में विलीन हो गए। मातृभूमि की बलि बेदी पर बलिदान देने वाले इस शहीद को कफन भी नसीब नहीं हो सकी। काफी खोजबीन के बाद भी पुलिस साथियों के द्वारा ईख के खेत में छिपाए गए शहीद नरेश के शव को नहीं पा सकी। देश आजाद होने के बाद डा. संपूर्णानंद खमरिया स्थित शहीद नरेश के घर पर सांत्वना देने पहुंचे और फफक कर खुद ही रो पड़े। बीएलजे इंटर कालेज मिर्जापुर के द्वारा शहीद नरेश छात्र निधि बनाकर गरीब छात्रों को आर्थिक सहायता प्रदान की जा रही है।

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें
विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

आज का पंचांग : 11 दिसंबर 2018, मंगलवार

मंगलवार 11 दिसंबर को लग रहा है कौन सा नक्षत्र और बन रहा है कौन सा योग? दिन के किस पहर करें शुभ काम? जानिए राहुकाल और शुभ मुहूर्त यहां और देखिए पंचांग मंगलवार 11 दिसंबर 2018।

11 दिसंबर 2018

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Election