छत्तीसगढ़ में स्लैब गिरने से चार श्रमिकों की मौत

Bhadohi Updated Mon, 23 Jul 2012 12:00 PM IST
चौरी/खमरिया। छत्तीसगढ़ के रायपुर जिले के कोरवा स्थित एक पावर प्लांट में रोजी-रोटी के सिलसिले में काम करने गए जिले के चार श्रमिकों की टावर का स्लैब गिरने से दबकर दर्दनाक मौत हो गई। हादसे में पांच श्रमिक गंभीर रूप से घायल हो गए। शनिवार को हुए हादसे के बाद रविवार को दोपहर में शव घर आने से कोहराम मच गया। मरने वालों में दो खमरिया, एक चौरी के निदुर और एक औराई के भगवासपुर का निवासी है। श्रमिकों पर भारी वजनदार लोहा गिरने से उनके शव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गए थे। इससे शव को देखने का साहस हर कोई नहीं कर पा रहा था। शनिवार को हादसे की खबर आते ही मृतकों के गांवों के लोग शव का इंतजार कर रहे थे। शव आधा घंटा तक घर में रखने के बाद अंतिम संस्कार के लिए ले जाया गया।
चौरी थानाक्षेत्र के निदुर गांव निवासी अरविंद सरोज (18) पुत्र बृजलाल, औराई थानाक्षेत्र के भगवासपुर गांव निवासी लोलारख सरोज (32) और खमरिया नगर के वार्ड आठ (मनऊवीर) निवासी लवकुश सरोज (20) पुत्र स्व. राजबली सरोज, जितेंद्र सरोज (20) पुत्र दिनेश सरोज एक वर्ष से रायपुर में रहकर एक पावर प्लांट में काम कर रहे थे। शनिवार को उनके अलावा कई युवक टावर के नीचे काम कर रहे थे। टॉवर पर कई टन वजन के स्लैब घिरनी के माध्यम से चढ़ाए जा रहे थे। बताया जाता है कि इसी बीच अचानक घिरनी का हुक टूट गया और स्लैब नीचे काम कर रहे श्रमिकों के ऊपर आ गिरा। इससे काम कर रहे चारों युवकों की मौके पर ही मौत हो गई। इसके अलावा खमरिया नगर के ही निवासी संतोष कुमार पुत्र बचानु सरोज, शशि सरोज पुत्र गुलाब सरोज, प्रिंस सरोज पुत्र विश्वनाथ सरोज, राजेश यादव पुत्र पंधारी बुद्धिराम सरोज पुत्र राजबली गंभीर रूप से घायल हो गए। शनिवार को मृतकों के शव और घायलों को एंबुलेस से उनके घर भेजा गया। रविवार को दोपहर में घर पहुंचे शव देखते हुए मृतकों के परिजनों में कोहराम मच गया। एक दिन पहले से शोकमग्न गांव के लोग अपने आंसू नहीं रोक पाए।

मां-बाप हुए बेसुध, बच्चे अनाथ
संवाददाता
चौरी। रायपुर में स्लैब हादसे जान गंवाने वाले निदुर निवासी अरविंद सरोज (18) पुत्र बृजलाल घर की माली हालत खराब देख परदेश गया था, लेकिल हालत सुधारने को कौन कहे, घर का कमाऊ पूत ही छिन गया। जवान बेटे की मौत से मां-बाप बेसुध हो गए थे। शव आते ही वे बदहवास हो गए। उन्हें ढांढस देने वाले खुद भावुक हो जा रहे थे। इसी तरह भगवासपुर निवासी लोलारख सरोज भी बिरादरी के युवक के माध्यम से परिवार की गाड़ी आगे बढ़ाने के लिए परदेश गया था। कमाकर बच्चों का भविष्य संवारना था, लेकिन किसी को क्या पता था कि वहां उसका इंतजार मौत कर रही है। लोलारख को दो लड़कियां और एक लड़का है। बच्चों सहित पत्नी का रो-रोकर बुरा हाल हो गया था। अब बच्चों को कैसे सहारा मिलेगा, यह सभी सोच रहे थे।

मोहल्ला गम में डूबा
खमरिया। नगर के वार्ड नं. आठ मनऊवीर में दो-दो मौतों से पूरा मोहल्ला गम में डूबा रहा। मोहल्ले के लोग सांत्वना देने के लिए तय नहीं कर पा रहे थे कि इधर जाएं कि उधर जाएं। मृतकों के अलावा घायलों के यहां भी परिजन बेसुध पड़े थे। लवकुश सरोज जो कि पिता की कुछ दिन पूर्व हुई मौत से कंधे पर आई जिम्मेदारी को निभाने के लिए कमाने गया था। जतेंद्र सरोज के पिता 12 वर्ष पहले मानसिक दशा खराब होने से कही चले गए हैं। वह घर की जिम्मेदारी संभालने के लिए कमाने गया था। दोनों की माताओं का करुण क्रंदन देख लोग द्रवित हो जा रहे थे।

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