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मुआवजे के लिए भटक रही विधवा

Bhadohi Updated Thu, 05 Jul 2012 12:00 PM IST
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भदोही। सरकार द्वारा आम जनता की सहुलियतों का ध्यान रखने के लिए भले ही विभागों में तैनात अधिकारियों पर करोड़ों रुपये वेतन पर खर्च किया जा रहा हो लेकिन हकीकत यह है कि अधिकारी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन ठीक ढंग से नहीं कर रहे हैं। मामला विद्युत तार की चपेट में आकर एक राजकीय शिक्षक की मौत से जुड़ा हुआ है। शिक्षक की विधवा को विभाग से एक लाख रुपये का मुआवजा अप्रैल में स्वीकृत हुआ था जिसके लिए विधवा के चप्पल घिस चुके हैं लेकिन मुआवजे की रकम का अता पता नहीं है।
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जानकारी हो कि रजपूरा कालोनी निवासी शिक्षक लालजी यादव का 13 अप्रैल 2011 को विद्युत तार की चपेट में आकर दुखद मौत हो गई थी। इस घटना के बाद बेतरतीब विद्युत तारों को लेकर जनता में काफी आक्रोश पनपा था। उसी के बाद से मृत शिक्षक की विधवा उषा देवी को मुआवजा दिलाने की पहल शुरू हुई थी। बड़ी मुश्किल से लंबी भाग दौड़, जांच पड़ताल के बाद विभाग के अधीक्षण अभियंता, मोहन सिंह ने श्रीमती उषा देवी को अपने पत्र दिनांक 25 अप्रैल के माध्यम से अवगत कराया कि उनका मुआवजा स्वीकृत हो चुका है। तब से लेकर आज तक श्रीमती उषा देवी विद्युत उपकेंद्र के चक्कर लगा लगा कर थक गई हैं लेकिन उन्हें कोई सही जवाब नहीं मिल रहा है।
इस मामले में अधिशासी अभियंता, भदोही विद्युत वितरण खंड प्रथम, रामबाबू चौधरी का कहना है कि जब तक धनराशि उनके विभाग को नहीं जारी हो जाती मैं कैसे कुछ कर सकता हूं? हालांकि पीडि़त विधवा का कहना है कि 8 मई को श्री चौधरी की ओर से धन आवंटन के लिए निदेशक (वित्त) पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम को पत्र गया है। यहां तक तो सब ठीक ही कहा जाएगा लेकिन बुधवार को जब निगम के उपमहाप्रबंधक (वित्त), रमाशंकर प्रसाद से इस बाबत पूछा तो उन्होंने कहा कि धन कब का आवंटित हो चुका है।

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