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चार साल बाद भी नहीं मिला जननी सुरक्षा का लाभ

Bhadohi Updated Wed, 04 Jul 2012 12:00 PM IST
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ज्ञानपुर। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र सुरियावां में वर्ष 2007-08 में प्रसव कराने वाली 183 महिलाओं को राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत संचालित जननी सुरक्षा योजना का 1400 रुपये का चेक आज तक नहीं मिल सका है। प्रसूता महिलाओं ने कई बार अधिकारियों से शिकायत की लेकिन इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई।
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एनआरएचएम में हजारों करोड़ रुपये का घोटाला सामने आया है और कई अधिकारी और नौकरशाह जेल की हवा खा रहे हैं। वहीं योजना के सही हकदारों को आज तक जननी सुरक्षा योजना के तहत चेक ही नहीं प्रदान किया गया है। महिलाएं चार साल से अधिकारियों के कार्यालयों का चक्कर काट रही हैं लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही है। अब तो अधिकारी यह भी कह रहे हैं कि उस वर्ष लक्ष्य से अधिक महिलाओं की डिलीवरी हुई थी इस कारण लक्ष्य के सापेक्ष जितना धन था वह तत्काल प्रसूताओं को दे दिया गया था। इसके अलावा जितने महिलाओं ने बच्चों को जन्म दिया था उनके लिए अतिरिक्त बजट शासन से आज तक नहीं भेजा गया और न ही आगे आने की संभावना ही है। वर्तमान बजट से चार साल पुराने केस का निस्तारण करने का कोई प्रावधान एनआरएचएम में नहीं है।
सुरियावां थाना क्षेत्र के अभियां निवासिनी श्रीमती सुलेखा देवी पत्नी शक्ति दूबे ने अधिकारियों को भेजे पत्र में कहा है कि वर्ष 2008 में उसने सुरियावां सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र से संबद्ध उप स्वास्थ्य केंद्र अभियां में एक बच्चे को जन्म दिया था। जननी सुरक्षा योजना के तहत राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन के तहत उसे 1400 रुपये का चेक आज तक नहीं मिल सका है। कहा कि उसके साथ ही अस्पताल में बच्चे को जन्म देने वाली 183 महिलाएं इस लाभ से वंचित हैं। इस संबंध में जिलाधिकारी, मुख्य चिकित्सा अधिकारी सहित कई अधिकारियों और शासन को पत्र लिखा गया लेकिन बजट न होने की बात कहकर आज तक जननी सुरक्षा योजना का लाभ नहीं दिया गया। इस संबंध में मुख्य चिकित्सा अधिकारी डा. त्रिलोचन सिंह ने बताया कि अपर मुख्य चिकित्सा अधिकारी से इस मामले की जांच कराई गई थी। वित्तीय वर्ष 2007-08 में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुरियावां को उपलब्ध बजट से 183 केस अधिक हो गए थे। जिसके कारण 183 केसों का भुगतान लंबित रहा। उन्हीं लंबित केसों में शिकायतकर्ता का भी केस शामिल है। सीएमओ ने बताया कि लंबित केसों के भुगतान के लिए कोई बजट प्राप्त नहीं हुआ है और न ही वर्तमान बजट से भुगतान करने का कोई प्रावधान है। उधर शिकायतकर्ता सुलेखा देवी ने इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाने की चेतावनी दी है। कहा कि योजना का लाभ सभी प्रसूताओं को मिलना चाहिए। केंद्र कि 183 प्रसूताओं के साथ विभाग के द्वारा अन्याय किया जा रहा है।

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