मेले के विस्तार को धन मिलना जरूरी

Bhadohi Updated Tue, 26 Jun 2012 12:00 PM IST
सीतामढ़ी। पौराणिक स्थली सीतामढ़ी के लवकुश जन्मोत्सव मेले के विस्तार और धार्मिक-सांस्कृतिक कार्यक्रम के आयोजनों के लिए शासन से धन की मांग उठने लगी है। बुद्धिजीवियों और आम जनता का कहना है कि वर्षों से यहां नौ दिवसीय मेले का आयोजन होता आ रहा है। बीते तीन दशक से भजन-प्रवचन, श्रीराम कथा के आयोजन में राष्ट्रीय स्तर के विद्वान आते हैं। सीतामढ़ी प्रदेश के पर्यटन मानचित्र में अंकित है। लेकिन, इस ऐतिहासिक मेले पर शासन और सांस्कृतिक विभाग की नजरें नहीं गईं हैं। महारानी सीता जी श्रीराम जानकी ट्रस्ट के अध्यक्ष पंडित काशी प्रसाद मिश्र का कहना है कि यह मेला पौराणिक है। श्रीराम और सीता के सुपुत्रों लवकुश के जन्मोत्सव के उपलक्ष्य में मेले का आयोजन होता है। इसमें भारी भीड़ होती है। इसके विस्तार के लिए शासन से धन मिलना जरूरी है। मेला समिति के अध्यक्ष पं. उमाशंकर शुक्ल और मंत्री मुन्नालाल पांडेय ने कहा कि अखिल भारतीय राष्ट्रीय रामायण मेले का खर्च स्थानीय लोगों के सहयोग से पूरा होता है। राष्ट्रीय स्तर के विद्वान आते हैं। सांस्कृतिक विभाग को इसकी महत्ता को ध्यान में रखते हुए धन अवमुक्त करना चाहिए। स्थानीय कमला प्रसाद और भुंअर तिवारी का कहना है कि जिला प्रशासन से काफी कुछ करता है, लेकिन धन की कमी आड़े आती है। मानस प्रवीण मनोज चौबे ने कहा कि रामायण काल की यादों से जुड़े पौराणिक और धार्मिक मेले को राष्ट्रीय स्तर पर प्रचार प्रसार की जरूरत है। इसके लिए शासन से धन मिलना आवश्यक है।

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