15 जून तक डालेें धान की नर्सरी

Bhadohi Updated Mon, 11 Jun 2012 12:00 PM IST
औराई। बेजवां स्थित कृषि विज्ञान केंद्र में युवाओं को कृषि कार्य के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के लिए दो दिवसीय रोजगार परक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रशिक्षण का मुख्य विषय धान के बीज का उत्पादन तकनीक थी। प्रशिक्षण का शुभारंभ केंद्र प्रभारी डा. राजेंद्र प्रसाद ने किया। उन्होंने कहा कि किसानों को स्वावलंबी बनने का प्रयास होना चाहिए, जिससे उनका और देश का भला हो सके। केंद्र के वैज्ञानिक डा. आरपी चौधरी ने बीज एवं दाने में अंतर व बीजों के महत्व के बारे में विस्तार से प्रकाश डाला।
प्रशिणार्थियों को मृदा एवं शस्य वैज्ञानिक खेत की तैयारी में बीज उत्पादन के लिए मई में ही खेतों में हरी खाद के रूप में ढैंचे की बुवाई करनी चाहिए। धान की नर्सरी के लिए पांच सौ वर्ग मीटर ऊंचे स्थान वाले जल निकास मुक्त बलुई दोमट मिट्टी का चयन करना चाहिए। कहा कि बुवाई बीजशोधन के बाद ही करनी चाहिए। रोपाई भी पौधे का शोधन जिंक आक्साइड से करके ही करनी चाहिए। किसानों को धान की नर्सरी हर हाल में पांच से पंद्रह जून के बीच डाल देनी चाहिए। डा.राय ने बताया कि पृथक्करण की दूरी तीन मीटर एक प्रजाति से दूसरी प्रजाति के लिए अवश्य रखना चाहिए। तभी हम अनुवांशिक रुप से शुद्ध बीज प्राप्त कर सकते हैं। बीच-बीच में रोपाई के बाद अवांक्षनीय पौधों को निकाल देना चाहिए। धान की हाइब्रिड बीज के बारे में डा.राय ने बताया एप्रोमिक्सीस के कारण हम दुबारा प्रयोग नहीं कर सकते हैं, तथा इसका उत्पादन कठिन है। कहा कि खरपतवार से बचाव के लिए क्यूटाक्लोर 50 ईसी की डेढ़ लीटर एआई मात्रा का 800 से 1000 लीटर पानी घोलकर रोपाई के दो दिन बाद छिड़काव करना चाहिए। इस दौरान खेत में सात सेमी तक पानी भरा होना चाहिए। कीट रोग के बारे में भी शस्य व मृदा वैज्ञानिक ने चर्चा की। प्रशिक्षण कार्यक्रम में श्रीराम, सत्य प्रकाश, रत्नाकर, शुभम, अतुल के अलावा क्षेत्र के उचितपुर, शायर, भरतपुर आदि गांव के किसानों ने भाग लिया। प्रशिक्षणार्थियों को डा.राय ने प्रशिक्षण के बाद बीज भी दिया और उत्पादन बढ़ाकर स्वरोजगार पैदा करके हम पलायन को रोक सकते हैं।

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