सीबीआई ने खंगाली गड़बड़ी की फाइलें

Bhadohi Updated Sun, 10 Jun 2012 12:00 PM IST
औराई। तीन दिनों से जिले के प्रशासनिक अमले का रक्तचाप बढ़ा रही सीबीआई शनिवार को औराई सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में धमक पड़ी। सबसे बड़े एनआरएचएम घोटाले से जुड़े तार की टोह ले रही सीबीआई अधिकारियों की तीन सदस्यीय टीम ने 2005 से 2011 तक की एनआरएचएम से जुड़ी फाइलों को खंगाल डाला। करीब छह घंटे तक सीबीआई ने स्वास्थ्य महकमे की ओर से कराए गए छोटे-छोटे क्रियाकलापों के दौरान की गईं गड़बडि़यों को परत-दर-परत उधेड़ कर रख दिया। असलियत जानने के लिए जिन व्यवसायियों के बिल लगाए गए थे, उन्हें मौके पर तलब किया जा रहा था। हालांकि टीम का ध्यान छोटे-मोटे आयोजनों के दौरान खर्च और वाहन आदि पर व्यय की गई धनराशि पर ही अधिक था। टीम ने जननी सुरक्षा योजना और नए सामुदायिक भवन निर्माण जैसे तमाम बड़े बिंदुओं की फाइलों की ओर अभी अंगुली नहीं उठाई है।
एनआरएचएम घोटाले की शाखाओं की पड़ताल कर रही सीबीआई के तीन अधिकारियों इंस्पेक्टर एएस तडि़याल, आरके मौर्या और जीएस सोलंकी की टीम शनिवार को दोपहर करीब 12 बजे औराई सीएचसी में पहुंची। पहुंचते ही टीम ने सबसे पहले 2005 से 2011 तक की एनआरएचएम से जुड़ी फाइलें निकलवाईं और सीएचसी पर समय-समय पर आयोजित स्वास्थ्य कार्यक्रमों के दौरान मंगाए गए टेंट, कुर्सी और मेज आदि की मद में खर्च की धनराशि का हिसाब लेना शुरू किया। उन व्यापारियों को बुलाया गया, जिनके टेंट हाउस का बिल लगाया गया था। इन तीन व्यापारियों में से दो ने बिल पर अपना हस्ताक्षर होने से इनकार कर दिया। इसी तरह सीएचसी पर कैंप और स्वास्थ्य मेले आदि के दौरान जलपान आदि पर खर्च किए गए पैसे का ब्योरा भी लिया। उन हलवाइयों को बुलाया गया, जिनका बिल लगाया गया था। हलवाइयों ने अपना बिल होने से इनकार कर दिया। इन छह सालों की अवधि में पोलियो अभियान के दौरान किराए पर ली गईं गाडि़यों का बिल भी लगाया गया था। टीम ने उस ट्रैवेल्स एजेंसी के संचालक को मौके पर बुलाया, जिसका बिल लगाया था। ट्रैवेल्स एजेंसी संचालक ने 2005 से 2007 तक के बिलों को अपनी एजेंसी का होने से इनकार कर दिया। कहा कि 2007 से लगाए गए बिल उसकी एजेंसी के हैं। सीबीआई टीम जिन व्यापारियों को बतौर गवाह तलब कर रही थी, पहुंचते ही उनके सात-आठ हस्ताक्षर ले लिए जा रहे थे। फिर इन हस्ताक्षरों को बिल पर किए गए हस्ताक्षर से मिलाया जा रहा था। करीब छह घंटे तक सीबीआई टीम सीएचसी पर खर्च का हिसाब-किताब लेती रही। इस दौरान कई चिकित्सक और स्वास्थ्य कर्मचारी इधर-उधर दुबक कर कानाफूसी करते नजर आए। चिकित्सा प्रभारी डा. रामकुंवर और कार्यालय बाबू सीबीआई अधिकारियों द्वारा मांगे जा रहे रिकार्ड को उपलब्ध करा रहे थे। टीम ने आशा, एएनएम के अलावा डिलीवरी के लिए आईं महिलाओं से भी पूछताछ की। शाम छह बजे के आसपास टीम वहां से जांच-पड़ताल करके निकली।

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