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एकमा-सीईपीसी के प्रयास से संभव हुआ प्रतिबंध

Bhadohi Updated Sun, 10 Jun 2012 12:00 PM IST
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भदोही। अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) ने कहा है कि भारत सरकार द्वारा उधारी कालीन निर्यात पर प्रतिबंध स्वागतयोग्य कदम है। लोगों ने कहा कि इस फैसले के बाद इसीजीसी की भूमिका भी काफी महत्वपूर्ण हो गया है। पदाधिकारियों ने बताया कि शीघ्र ही ईसीजीसी के सहयोग से भदोही में एक कार्यशाला का आयोजन किया जाएगा ताकि उद्यमियों को इसकी सही जानकारी हो सके।
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एकमाध्यक्ष, ओएन मिश्र ने कहा कि निश्चित रूप से यह प्रतिबंध कालीन उद्योग के लिए कारगर सिद्ध होगा। इस निर्णय के बाद आयातक या तो बैंक गारंटी पर कालीन मंगा सकेंगे अथवा इसीजीसी कवर पर ही माल भेजा जा सकेगा जिसमें भुगतान का संकट नहीं होगा। मानद सचिव हाजी अब्दुल हादी अंसारी ने कहा कि डीए के चलते भारतीय कालीन निर्यातकों को 15 सौ करोड़ रुपये विदेशों में फंसा है। डीए पद्धति पर प्रतिबंध लगाने के लिए गत तीन वर्ष से मुहिम चलाई जा रही थी जिसमे सीईपीसी, डीजीएफटी, वस्त्र और वाणिज्य मंत्रालय के अधिकारियों ने उद्योग हितों को समझा इसलिए हम उनका शुक्रिया अदा करते हैं।
एकमा के लोगों से जब पूछा गया कि ईसीजीसी कवर छोटे निर्यातकों को मिल पाना मुश्किल है क्योंकि बड़े निर्यातक आयातकों के क्रेडिट का बड़ा हिस्सा लेकर बैठे रहेंगे। ऐसे में क्या मझोले निर्यातकों बिजनेस समाप्त नहीं हो जाएगा? इस सवाल पर उन लोगों ने माना की ऐसा संभव है लेकिन हम लोग इसीजीसी के सहयोग से इसका कोई हल निकालेंगे। पदाधिकारियों ने यह भी बताया कि सरकार द्वारा कालीन को पुन: फोकस्ड उत्पादों में शामिल करना साथ ही दो प्रतिशत का इंट्रेस्ट सबवेंशन घोषित करना उद्योग के लिए काफी राहत की बात है। इसके अलावा बैंक रियलाईजेशन सर्टिफिकेट जमा करने से निर्यातकों को छुटकारा देने को भी उद्यमियों ने स्वागत किया है। वार्ता में एकमा उपाध्यक्ष सुरेंद्र बरनवाल, कोषाध्यक्ष शिवसागर तिवारी और सीईपीसी प्रशासनिक सदस्य ओएन मिश्र बच्चा और इश्तियाक खां अच्छू भी थे।

कोरम के अभाव एकमा की बैठक स्थगित
भदोही। शनिवार को होने वाली अखिल भारतीय कालीन निर्माता संघ (एकमा) की वार्षिक आमसभा कोरम के अभाव में स्थगित कर दी गई। अब यह बैठक 16 जून को पुन: आहूत की गई है। एकमा के बाईलाज के अनुसार उस दिन कोरम पूरा हो अथवा नहीं बैठक होगी। इस आशय की घोषणा आज सदस्यों के इंतजार के बाद की गई। उल्लेखनीय है कि वार्षिक आमसभा में सत्र 12-13 और 13-14 के लिए पदाधिकारियों का चयन और कार्यकारिणी का गठन होना था।

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