क्लीन डीए पर प्रतिबंध का होगा दूरगामी लाभ

Bhadohi Updated Thu, 07 Jun 2012 12:00 PM IST
भदोही। पिछले तीन वर्षों से क्लीन डीए निर्यात पर प्रतिबंध की मांग के पूरा होने के बाद एकमा सहित कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के लोग गदगद हैं। बुधवार को सीईपीसी अध्यक्ष, सिद्धनाथ सिंह भदोही में पत्रकारों से मुखातिब हुए। उन्होने बैन लगने में आई बाधाओं को बयान करते हुए बताया कि सरकार के इस कदम से इंडस्ट्री डूबने से बच गई है।
श्री सिंह ने कहा कि यदि देश भर की बात करें तो डीए के चलते देश का 15 सौ करोड़ आयातकों के यहां फंसे हुए हैं। चूंकि कुछ बड़े निर्यातक डीए बैन नहीं चाहते थे इसलिए इस मांग को पूरा करने के लिए भारी लड़ाई लड़नी पड़ी। कहा इस काम में कालीन की 9 संगठनों का सहयोग सराहनीय रहा। उन्होंने इस मुहिम के एकमा के संयोजक, विनय कपूर का विशेष रूप से नाम लेते हुए कहा कि उन्होंने समय समय पर मंत्रालय को दिए जाने वाले फीडबैक में त्वरित कार्रवाई की जिससे चीजें आसान हो गईं।
चेयरमैन ने कहा कि अब जब हम लोग उधार नहीं बेचेंगे तो निश्चित रूप से इसका लाभ आने वाले दिनों मे देखने को मिलेगा। हो सकता है कि शुरू की 2-3 महीने थोड़ी दिक्कत आए लेकिन सरकार के इस कदम के दूरगामी लाभ होगा। कहा कि यदि इस पर बैन न लगता तो निश्चित रूप से भदोही से कालीन उद्योग समाप्त हो जाता। प्रेस वार्ता में उन्होंने प्रदेश के आठ प्रशासनिक समिति के सदस्यों की प्रशंसा करते हुए उनसे मिले सहयोग की चर्चा भी की। वार्ता में उमेश कुमार गुप्ता, कमरुद्दीन अंसारी, ओएन मिश्र बच्चा, इश्तियाक खां, घनश्याम शुक्ला के अलावा क्षेत्रीय सहायक निदेशक, विजय कुमार सिन्हा भी मौजूद थे।
अधिकारियों के सहयोग से आसान हो गया काम
भदोही। सीईपीसी चेयरमैन के अनुसार डीए कालीन निर्यात से उद्योग की बड़ी मछलियां छोटी मछलियों को खा जा रहीं थीं। यही कारण था कि वे डीए पर प्रतिबंध के पक्ष नहीं थे। इसके चलते प्रतिबंध पर सरकार की हामी भरवाना आसान काम नहीं था लेकिन जिस प्रकार डीजीएफटी डा.अनूप पुजारी, कपड़ा सचिव किरन ढिंगरा व एक्सपोर्ट प्रमोशन काउंसिल फार हैंडिक्राफ्ट्स के अधिशासी निदेशक राकेश कुमार ने सहयोग किया उससे काम आसान होता गया। उन्होंने बताया कि मुद्दा उठाए जाने के समय सभी लोगों ने प्रतिबंध का विरोध किया था लेकिन जब उन्हें इससे पैदा हो रही समस्याओं की जानकारी दी गई तो वे उन्होंने सहर्ष सहयोग किया।

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