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तवे की मानिंद तपी कालीन नगरी की धरती

Bhadohi Updated Sat, 02 Jun 2012 12:00 PM IST
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ज्ञानपुर। कालीन नगरी की धरती शुक्रवार को तवा बन गई तो आकाश शोले बरसाने वाली छत। इनके बीच लोग उबल गए। सुबह से देर रात तक उमस के कारण पसीने से चिप-चिपाता बदन सूख नहीं पाया और लोग हाल-बेहाल अवस्था में हालात को कोसते रहे। उस पर बिजली की धुआंधार कटौती। सुबह से दोपहर करीब दो बजे तक बिजली के दर्शन नहीं हुए। इस भीषण गर्मी में शहरवासी कराह उठे। बिजली दफ्तरों में फोन मिलाकर कई लोगों ने झुंझलाहट भरे तो कुछ ने कड़े शब्दों में हालचाल भी ले लिया। दोपहर बाद बिजली आई, लेकिन सुकून तब भी नहीं। पंखा तो बेकार, कूलर की हवा भी मानो शरीर को बस झाड़ रही हो, पसीना वैसे का वैसे ही। गर्मी और उमस से बिलबिलाए नगरवासियों को कहीं भी चैन नहीं मिल रहा था। बदन निचोड़-निचोड़कर बहती पसीने की धार ने लोगों को बेजार कर दिया।शुक्रवार को जिला मुख्यालय वालों के दिन की शुरुआत ही गर्म माहौल में हुई। आधी रात के बाद गुल हुई बत्ती के दर्शन सुबह करीब पांच बजे हुए। इसके घंटे भर के अंदर ही बिजली फिर कट गई और दोपहर दो बजे तक लोग पंखा और कूलर की ओर टकटकी लगाए बैठे रहे। इस दौरान गर्मी ने जमकर सितम ढाया। वातावरण में आर्द्रता इतनी बढ़ी कि हवा भी बेअसर साबित होने लगी। उमस के कारण पसीने से तर-बतर लोगों का जीना मुश्किल हो गया। बस, टेंपो आदि में यात्रा करने वालों की फजीहत सबसे ज्यादा हुई। यात्रियों के इंतजार में चौक-चौराहों पर खड़े आटो और बस में बैठे यात्री गर्मी से बेहाल हो उठे। बिजली की नामौजूदगी में घर में उमस ने सताया तो बाहर आग उगल रहे भगवान भास्कर की तल्खी ने चलना दूभर कर दिया। शाम पांच बजे तक सड़कों पर सियापा छाया रहा। लोग निकले भी तो सिर से पांव तक ढंके हुए। धूप की तल्खी सीधे जिस्म को बेध रही थी। शुक्रवार का दिन हाल के दिनों का सबसे उमस वाला दिन महसूस किया गया। सबका यही कहना था कि प्रकृति का कोप यही रहा तो मानवीय दुर्व्यवस्थाओं के बीच आम आदमी कहां जाएगा?
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