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बीटेक छात्रों के प्लेसमेंट की कवायद शुरू

Bhadohi Updated Thu, 31 May 2012 12:00 PM IST
भदोही। भारतीय कालीन प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईसीटी) से इस वर्ष दो दर्जन बीटेक इंजीनियर पास हो रहे हैं। इन सबके प्लेसमेंट की तैयारी संस्थान ने अभी से शुरू कर दी है। संस्थान में बुधवार की शाम एक प्लेसमेंट मीट का आयोजन किया गया जिसमें बीटेक छात्रों के अलावा तीन दर्जन से अधिक ट्रेंड बुनकर और लगभग 120 प्रशिक्षित कंप्यूटर आपरेटर, डायर व डिजाइनर्स शामिल है। प्लेसमेंट मीट को भले ही संस्थान द्वार खूब प्रचारित किया गया हो लेकिन उद्योग से गिने चुने लोग ही पहुंचे।

शुरू शुरू में जब आईआईसीटी की स्थापना भदोही में हुई थी तब किसी ने सोचा नहीं था कि यहां बीटेक कोर्स भी संचालित हो सकेंगे। लेकिन निदेशक प्रो.केके गोस्वामी ने यह काम कर दिखाया और कारपेट एंड टेक्सटाइल टेक्नोलाजी में बीटेक की एकदम नई कोर्स की शुरूआत की। आज यहां से हर साल दर्जनों बीटेक इंजीनियर्स निकल रहे हैं जो देश और विदेश के टेक्सटाइल युनिट्स में अच्छे ओहदे पर कार्यरत हैं। बीटेक शुरू होने के बाद जब यहां डाईंग मास्टरों, कंप्यूटर डिजाइनरों और कंप्यूटर आपरेटर्स की कमी महसूस होने लगी तो तत्काल उनके प्रशिक्षण की योजना को भी मूर्त रूप दे दिया गया। यही कारण है कि आज बीटेक के साथ साथ कालीन उद्योग के अन्य क्षेत्रों की सेवा करने के लिए 120 और छात्र तैयार हैं।

निदेशक श्री गोस्वामी ने बताया कि पिछले दिनों हैंडनाटेड बुनकरों की कमी को देखते हुए 40 महिला पुरुष बुनकरों की एक खेप तैयार की गई है। इन 40 लोगों को विशिष्ट मास्टर ट्रेनर रामजीत बिंद द्वारा प्रशिक्षित किया गया है। आज के प्लेसमेंट मीट की विडंबना यह रही कि खूब प्रचारित किए जाने के बाद भी आज इक्का दुक्का लोग ही छात्रों से मिलने पहुंचे। निदेशक के अनुसार यदि लोग बाद में भी आना चाहेंगे तो लोग प्लेसमेंट अधिकारी से संपर्क कर सकते हैं।

आसान नहीं है इन बुनकरों को काम मिलना
फोटो-52 मास्टर ट्रेनर रामजीत बिंद।
भदोही। आईआईसीटी से प्रशिक्षित होकर निकलने वाले 40 बुनकरों को काम मिलना आसान नहीं है। तीन माह का प्रशिक्षण हासिल करने वाले इन बुनकरों ने परंपरागत नाटेड कालीन बुनाई में दक्षता हासिल की है जो पिछले कुछ वर्षों से तेजी से विलुप्त हो रहा है। आज भदोही मिर्जापुर परिक्षेत्र से जो भी नाटेड कालीनों का निर्यात हो रहा है वह मुख्यत: शाहजहांपुर से बनकर आ रहा है।
बुनकरों को प्रशिक्षित करने वाले रामजीत बिंद ने कहा कि ये बुनकर पूरी तरह से ट्रेंड हो चुके हैं और किसी भी क्वालिटी का नाटेड कालीन बना पाने में सक्षम हैं। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण प्राप्त करने के बाद अब इन्हें काम की कमी सता रही है। आज जो प्लेसमेंट मीट हुआ उसमें इन बुनकरों के मतलब का कोई नियोक्ता नहीं आया। जब श्री बिंद से पूछा गया कि क्या ये बुनकर निर्यातकों के कारखानों में जाकर काम करेंगे? तो उन्होने ना में जवाब दिया। उन्होंने कहा कि सरकार उन्हें लूम खरीदने में सब्सिडी दे तो वे कच्चा माल लाकर अपने घर पर बुनाई कर सकते हैं। उन्होंने यह भी कहा कि वैसे प्राथमिकता यह है कि इन बुनकरों को सरकार आर्थिक रूप से सुदृढ़ करे ताकि वे अपने लूम पर अपना कालीन तैयार कर उन्हें खुले बाजार में बेच कर आत्मनिर्भता की ओर बढ़ें।

बच्चों को वितरित किया गया यूनिफार्म
ज्ञानपुर। कालीन निर्यात संवर्धन परिषद (सीईपीसी) के कल्याणकारी कार्यक्रम के तहत भदोही-मिर्जापुर कालीन क्षेत्र में कालीन मजदूरों, बुनकरों और उनके बच्चों को शिक्षित करने के लिए योजनाएं चलाई जा रही हैं। इसी कड़ी में डीघ विकास खंड के बैरीबीसा में स्थित बाल शिक्षा निकेतन के बच्चों को यूनिफार्म के साथ ही साथ स्कूल बैग, जूता, मोजा आदि का वितरण किया गया। इस मौके पर उमेश कुमार गुप्त, ओकार नाथ मिश्र मौजूद रहे। सभी अध्ययनरत बच्चों को 150 रुपये की दर से छात्रवृत्ति भी बांटी गई। उमेश गुप्त ने कहा कि परिषद कालीन उद्योग से बालश्रम हटाने के लिए पूरी तरह से कटिबद्ध है। कार्यक्रम का संचालन विनय कुमार सिन्हा ने किया। इस मौक पर मनीष प्रताप सिंह सहित बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे।

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