अब भी अनुत्तरित हैं कई सवाल

Bhadohi Updated Thu, 24 May 2012 12:00 PM IST
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ज्ञानपुर। ललऊ मुठभेड़ कांड में सीबीसीआईडी की ओर से आरोपी पुलिसकर्मियों को क्लीन चिट दिए जाने के साथ ही कई सवाल भी उठ खड़े हुए हैं। कहते हैं कि अपराधी कितना भी चालाक क्यों न हो, सबूत छोड़ ही जाता है। पुलिस का यह संवाद इस कांड में स्वयं पुलिस पर भी लागू होता दिख रहा है। इस कहानी में जो अनुत्तरित प्रश्न लोगों को मथ रहे हैं, उनमें सबसे पहला यह कि मृतक की पोस्टमार्टम रिपोर्ट में कुल 11 चोटें पाई गईं हैं। इसमें एक गनशॉट इंजरी महज 4-6 फीट की दूरी से कारित की गई है। ऐसे में मुठभेड़ के दौरान इतनी कम दूरी से किन परिस्थितियों में गोली मारी गई होगी? दूसरा जब वायरलेस सेट से बदमाशों को उगापुर से औराई की तरफ जाने की बात बताई गई थी तो तत्कालीन थानाध्यक्ष औराई के बयान के अनुसार औराई से लालानगर की तरफ क्यों चल दिए। गोपीगंज पुलिस का बदमाशों से सामना लालानगर मोड़ पर हुआ था तो उसी समय औराई थानाध्यक्ष भी मयफोर्स लालानगर मोड़ पर पहुंच गए। यानी कि उनके सामने बदमाशों की लोकेशन औराई से ही थी। तीसरा औराई और ज्ञानपुर के थानाध्यक्षों को वायरलेस पर अलग-अलग सूचनाएं कैसे मिल गईं। अंकित के बयान के मुताबिक 12.50 बजे औराई थानाध्यक्ष को सूचना मिली कि बदमाश उगापुर से औराई की ओर भाग रहे हैं जबकि थानाध्यक्ष ज्ञानपुर के बयान के मुताबिक उनको यह सूचना मिली कि 12.50 बजे बदमाश औराई से ज्ञानपुर की ओर भाग रहे हैं। अगर बदमाश भाग रहे थे तो यह किसे पता था कि वे औराई से भागकर लालानगर होते हुए ज्ञानपुर ही आएंगे। अगला सवाल यह भी खड़ा होता है कि बदमाशों की लोकेशन लगातार वायरलेस सेट पर बताई जा रही थी। बदमाश अचानक चकवा से जगापुर की तरफ नहर के रास्ते मुड़ गए। नहर पर मुड़ने की सूचना चकवा पहुंचने पर ही दी गई। ऐसे में थानाध्यक्ष ज्ञानपुर बिराहिमपुर के नहर पुल पर क्यों मौजूद थे। जबकि उनको उस समय लालानगर वाली सड़क पर होना चाहिए था। एक सवाल यह भी खड़ा होता है कि किसकी सूचना पर 12.50 बजे वायरलेस सेट पर बदमाशों के भागने की सूचना दी गई। एक और सवाल जो आम आदमी के गले नहीं उतरेगा वह यह कि बड़वापुर के पास नहर के दोनों तरफ दो-दो जीप भरकर पुलिसकर्मी मुठभेड़ कर रहे थे। उसी बीच एक बदमाश मोटरसाइकिल समेत कैसे भाग गया। जबकि वह उस समय 28 पुलिसकर्मियों के बीच घिरा था।
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भदोही जिले में अपराध का ग्राफ तो छोटा है, लेकिन फर्जी मुठभेड़ का दायरा बड़ा है। मामला अब न्यायालय में लंबित है। जिसमें चार जून की तिथि नियत है। विवेचक द्वारा दी गई इस राहत पर पुलिस वालों को चैन तो आया होगा, लेकिन मृतक की दोनों पत्नियां अब भी अपने-अपने अधिवक्ताओं के संपर्क में हैं।
इनसेट
आखिर क्यों करनी पड़ी फर्जी मुठभेड़
ज्ञानपुर। बदमाश की दोनों पत्नियों का बयान विवेचक ने दर्ज किया है। उसके मुताबिक मृृतक की दूसरी पत्नी पिंकी अपने पति मृतक ललऊ के साथ गोपीगंज में रहती थी। पर एक दिन उसका पति से झगड़ा हो गया। उसी झगड़े की पूछताछ के लिए गोपीगंज चौकी प्रभारी एक सिपाही के साथ मृतक के घर जांच करने गए थे। पिंकी के बयान के मुताबिक चौकी प्रभारी के साथ गया सिपाही बराबर आने-जाने लगा और उससे छेड़छाड़ भी करने लगा। इसी से परेशान होकर मृतक पूरे परिवार के साथ गोपीगंज छोड़कर इलाहाबाद में रहने लगा। लेकिन, उसे क्या मालूम कि कानून के हाथ बहुत लंबे होते हैं, जो उसे इलाहाबाद स्थित उसके आवास से भी उठा लाएंगे। मृतक की पहली पत्नी छोटी देवी के अनुसार घटना के समय उसकी 17 वर्षीय पुत्री भी उसके पति के साथ रहती थी। छोटी देवी ने अपने अधिवक्ता केके मालवीय के माध्यम से सीबीआई जांच के लिए प्रार्थना पत्र भेजा है।
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